वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedanta Paribhasha Hindi
धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा
स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)
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राष्ट्रगुरु श्री १००८ श्री स्वामीजी महाराज
( श्री पीताम्बरा पीठ परिषद्, दतिया )
भवत्प्रेषितं सविवरण प्रकाशाख्यं सारगर्भितं वेदान्त-परिभाषा-ग्रन्थस्य व्याख्यानं दृष्ट्वा अतिमोदं लब्धवानस्मि ।
सांख्यतत्त्व कौमुदीग्रन्थस्यापि तत्त्वप्रकाशिकाख्यं हिन्दीव्याख्यानं भवन्निर्मितं तत्सदृशमेव ।
दर्शनशास्त्राध्येतॄणां विद्यार्थिनां तथा विदुषां च समानमेवोपयोगित्वं यास्यति ग्रन्थद्वयम् इति ।
श्री स्वामीजी महाराज, दतिया
महामहोपाध्याय श्रीगिरिधरशर्मा चतुर्वेदी
वाचस्पति ( का० हि० वि० वि० ), साहित्य-
वाचस्पति ( हि० सा० स० ) भारतशासन
द्वारा सम्मान-पत्र-प्राप्त ।
( सम्मानित प्राध्यापक : वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय )
श्री गजानन शास्त्री मुसलगांवकर के द्वारा विरचित ‘वेदान्तपरिभाषा’ की ‘प्रकाश’ नाम की हिन्दी भाषामयी व्याख्या के कुछ अंशों को मैंने सुना। व्याख्याकार ने ‘वेदान्तपरिभाषा’ में कहे हुए अर्थों को बहुत विस्तार से समझाया है। इससे अल्पबुद्धिवाले लोगों की समझ में भी वेदान्त-परिभाषा के गूढ तत्व भली भाँति आ सकते हैं। वास्तव में ‘वेदान्तपरिभाषा’ छोटा सा ग्रन्थ होने पर भी अत्यन्त जटिल है। इस पर ऐसी ही विस्तृत व्याख्या की आवश्यकता थी। उस आवश्यकता को व्याख्याकार श्री गजानन शास्त्री ने पूर्ण किया है ओर अपनी व्याख्या द्वारा इस जटिल ग्रन्थ को भी सब के लिए सुबोध बनाने का यत्न किया है, इस यत्न में वे पूर्णतया सफल भी हुए हैं यह निस्संकोच कहा जा सकता है।
मैं इस व्याख्या के संस्कृतप्रेमी जनता में पूर्ण प्रचार होने की आशा रखता हूँ।
—गिरिधरशर्मा चतुर्वेदी