वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedanta Paribhasha Hindi
धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा
स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)
पृष्ठ 19, कुल 482 में से
संदर्भ में पढ़ेंदो शब्द
सर्वैकमूर्तिः प्रथितः पृथिव्यां श्रीशारदायाः पुरुषावतारः ।
विद्वत्सु राजेश्वरशास्त्रिपादः दद्याद् गुरुः सद्बलमाशिषां मे ॥
विश्वविख्यात-वैदुष्य-श्रीसदाशिव-शास्त्रिणाम् ।
पुत्रोऽयं मुसल-ग्रामकरोपाह्वो गजाननः ॥
राष्ट्रभाषां समाश्रित्य लोककल्याणकाम्यया ।
वेदान्त परिभाषाया व्याख्यानं कुरुते मुदा ॥
वेदान्त परिभाषा का सविवरण प्रकाश मूलार्थ तथा टिप्पणी सहित द्वितीय हिन्दी संस्करण, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को लक्ष्य में रखकर तैयार किया गया है। इस ग्रन्थ का अध्ययन-अध्यापन आसेतु-हिमाचल हो रहा है, एवं अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी यह निर्धारित है। तथापि इस ग्रन्थ का ऐसा कोई संस्करण अभी तक उपलब्ध नहीं, था जो हिन्दी के माध्यम से—अध्ययन-शील जिज्ञासुओं की आवश्यकताओं को पूर्ण कर सके।
व्याख्या लिखते समय वेदान्त-परिभाषा के प्रायः सभी संस्करणों का यथेष्ट अध्ययन किया गया है। विवादग्रस्त विषयों को सुलझाने तथा सरलता के साथ विषय-विवेचन के लिए इन संस्करणों से विशेष सहायता प्राप्त हुई है—म० म० श्री अनन्तकृष्ण शास्त्रीकृत व्याख्या (कलकत्ता), श्री शिवदत्तकृत 'अर्थदीपिका' व्याख्या (चौखम्भा, वाराणसी), 'शिखामणि मणिप्रभा' व्याख्या, 'प्रकाशिका' व्याख्या, स्वामी गोविन्दसिंहजी निर्मित 'आर्यभाषाविवृति', आचार्य भक्त श्री विष्णुशास्त्रीजी का 'वेदान्तपरिभाषार्थ', वेदान्तपरिभाषा का श्री एस० माधवा-नन्द कृत आंग्ल अनुवाद और वेदान्तपरिभाषा का श्री सूर्यनारायण शास्त्रिकृत आंग्ल अनुवाद, श्री पञ्चाननभट्टाचार्यशास्त्री का 'परिभाषासंग्रह।' उपर्युक्त प्रथित-कीर्ति महानुभाव लेखकों की अनुपम कृतियों से जो सहायता प्राप्त हुई है, तदर्थ इन उपकारक लेखकों का मैं अत्यंत आभारी एवं चिरऋणी हूँ। इनके लिए वाचिक धन्यवाद-अर्पण करना भी मुझे न्यून प्रतीत हो रहा है। अतः कृतज्ञता के सुरभित पुष्पों को उपर्युक्त विद्वानों के चरणों पर चढ़ाकर मैं स्वयं अपने को धन्य मान रहा हूँ।
इस संस्करण में छात्र कल्याणार्थ दिए गए चित्रपट तथा संकेतस्थल सहित उद्धरण-सूची का निर्माण आयुष्मती मेरी छात्रा डा० (कु०) विमला कर्नाटक