भारतकोश
वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedanta Paribhasha Hindi

धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा

स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 482 में से

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॥ श्रीः ॥

शास्त्र-मर्मज्ञ विद्वानों के आशीर्वाद

श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्यवर्य श्रीमच्छंकर भगवत्पाद-प्रतिष्ठित श्रीकाञ्ची कामकोटि पीठाधिप जगद्गुरु श्रीमच्चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती श्रीपादादेशानुसारेण श्रीमज्जयन्द्रसरस्वतीश्रीपादैः क्रियते नारायणस्मृतिः ।

अद्वैतवेदान्तशास्त्रप्रमेयजिज्ञासूनामुपकाराय महाविदुषा श्रीधर्मराजाध्वरीन्द्रेण रचितायाः वेदान्तपरिभाषायाः वाराणसीक्षेत्रवास्तव्येन मीमांसाचार्येण श्रीगजानन-शास्त्रिमुसलगांवकरमहोदयेन कृता प्रकाशाख्य-हिन्दीव्याख्या उचितविवरण-शङ्का-समाधानसहिता अत्र उपहृता ।

हिन्दीज्ञाः साधारणजनाः छात्राश्च एतद्ग्रन्थसाहाय्येन अद्वैतवेदान्त-प्रमेयाणि जानन्तः, यथार्हं भाष्यादिग्रन्थ-पठनेन आत्मज्ञानप्राप्तियोग्यतां संपादयेयुरिति, श्रीमुसलगांवकरमहोदयाश्च एवंविधसद्ग्रन्थान् रचयन्तो भगवत्प्रसादात् प्रेयः श्रेयःपरम्पराः अवाप्नुयुरितिचाऽऽशास्महे ।

नारायणस्मृतिः


परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीशंकरावतार अनन्त-श्रीविभूषित स्वामी करपात्रीजीमहाराज

पण्डित मुसलगांवर्कर, श्री गजानन शास्त्री न्याय, वेदान्त, मीमांसा, सांख्य-योगादि शास्त्रों के प्रकाण्ड पण्डित हैं । विशेषतः उनकी लेखन शैली बहुत ही अच्छी है, विविध युक्तियों के द्वारा कठिन से कठिन ग्रन्थों के विषयों को सरल एवं सुबोध बना देने की कला उनमें ईश्वर की देन है । उनके अनेक ग्रन्थों में यह वेदान्त परिभाषा की हिन्दी प्रकाशाव्याख्या अन्यतम ग्रन्थ है । इसमें विषय का स्पष्टीकरण बहुत सुन्दर ढङ्ग से किया गया है तथा विषमस्थलों की टिप्पणियाँ भी महत्त्वपूर्ण हैं । आशा है जिज्ञासु सज्जन इससे पर्याप्त लाभ उठायेंगे ।

करपात्र स्वामी