वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका १०५ आपस में विशेषणविशेष्य बनकर विरोधी अंशों का व्यावर्तन करके देवदत्त में एकत्व की प्रतीति कराते हैं। इसलिए इस वाक्य द्वारा विशेषणविशेष्यभावसम्बन्ध से एक देवदत्त का ही बोध होता है। इस सम्बन्ध के आधार पर ‘सः’ पद ‘अयम्’ का विशेषण तथा ‘अयम्’ को ‘सः’ का विशेष्य मान लिया जाता है तथा तत्कालविशिष्ट एतत् कालविशिष्ट में प्रतीत होने वाले विरोध का व्यावर्तन होने से अयम् पद सः का विशेषण बन जाता है। इसप्रकार दोनों पद परस्परभेद के व्यावर्तक होने से देवदत्त पिण्ड अर्थात् व्यक्ति में एकत्व का बोध कराते हैं। ठीक इसीप्रकार विशेषणविशेष्यभावसम्बन्ध से ‘तत्त्वमसि’ इस वाक्य में भी जीव और ब्रह्म में ऐक्य की सिद्धि की जाती है। इस स्थिति में ‘तत्’ पद से सामान्यतया परोक्षत्वादिविशिष्टचैतन्य तथा ‘त्वम्’ पद से अपरोक्षत्वादि विशिष्टचैतन्यरूप अर्थ के कारण भेद की प्रतीति होती है, किन्तु इनके परस्पर प्रतीत होने वाले इस भेद को विशेषणविशेष्यभावसम्बन्ध द्वारा दूर कर दिया जाता है। इस व्यावर्तन के परिणामस्वरूप दोनों पदों से विशुद्ध चैतन्यमात्ररूप अर्थ की प्रतीति होती है। (३) लक्ष्यलक्षणसम्बन्ध–सामान्यरूप से अभिधा शब्दशक्ति पदों के साक्षात् संकेतित अर्थ का बोध कराती है, किन्तु मुख्यार्थ के बाध होने पर रूढ़ि अथवा प्रयोजनवश उससे सम्बन्धित अर्थ की प्रतीति लक्षणा शब्द शक्ति द्वारा करायी जाती है। जैसे–‘सोऽयं देवदत्तः’ यहाँ प्रयुक्त ‘सः’ पद का मुख्यार्थ भूतकालविशिष्ट देवदत्त तथा ‘अयम्’ का वाच्यार्थ एतत्काल विशिष्ट देवदत्त होगा। तत्कालविशिष्ट और एतत्कालविशिष्ट में यहाँ प्रत्यक्षतः विरोध प्रतीत हो रहा है, किन्तु प्रतीत होने वाले इस विरोध का परित्याग करके अविरुद्ध अंश देवदत्त में अर्थग्रहण करने के लिए यहाँ लक्षणा का आश्रय लेना आवश्यक हो जाता है। जिसके द्वारा यह अर्थावबोध कराया गया है। वस्तुतः यह लक्षणा सामान्यलक्षणा से भिन्न ‘जहदजहल्लक्षणा’ मानी गई है, क्योंकि उक्त वाक्य में ‘सः’ और ‘अयम्’ पदों द्वारा प्रदर्शित वाच्यार्थों के विरुद्धांशों को त्यागकर केवल अविरुद्ध तत्त्व देवदत्त में ही अभिप्राय ग्रहण किया गया है। अतः थोड़ा-सा छोड़ देने