वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 123, कुल 314 में से
संदर्भ में पढ़ेंमङ्गलाचरण १०९ (क) सच्चिदानन्दम्-सभी वेदान्तग्रन्थों में ब्रह्म के लिए इस विशेषण का प्रयोग किया गया है, जो इसकी तीन विशेषताओं की ओर संकेत करता है सत्, चित् और आनन्द। सत् शब्द अस् भुवि धातु से शत् प्रत्यय करके निष्पन्न होता है। इसका अभिप्राय है सत्तावान्। यहाँ प्रयुक्त सत् शब्द भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों में उसकी विद्यमानता का कथन करता है, क्योंकि वेदान्तदर्शन के अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जो तीनों कालों में यहाँ तक कि प्रलय के उपरान्त भी विद्यमान रहती है। यह न केवल सृष्टि के आरम्भ में विद्यमान थी, अपितु वर्तमान में भी है तथा आगे भी रहेगी। अतः यह कालातीत यथार्थसत्ता है। चिती संज्ञाने धातु से क्विप् प्रत्यय करके निष्पन्न 'चित्' शब्द ज्ञान का वाचक है। ब्रह्म को चित् कहकर उसके ज्ञानस्वरूप का प्रतिपादन किया गया है। तैत्तिरीयोपनिषद् कहता है-'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' (2/1/1) बृहदारण्यकोपनिषद् उसे विज्ञान कहता है- विज्ञानमानन्दं ब्रह्म (3/9/28)। अतः ब्रह्म विज्ञानमय है। विज्ञान का सामान्य अर्थ है- विशिष्टज्ञान अथवा विशुद्ध ज्ञान। यहाँ ब्रह्म को विज्ञान इसलिए कहा गया है, क्योंकि इसके द्वारा सभी पदार्थ जाने जाते हैं, वह ज्ञानस्वरूप है। चित् शब्द का एक अन्य अर्थ चैतन्य भी है, अर्थात् सभी प्राणियों, वनस्पतिजगत् आदि में जो चैतन्य प्रतीत होता है, वह उनमें ब्रह्म के अस्तित्व को सिद्ध करता है। वाचस्पतिमिश्र ने 'चित्' का अर्थ 'स्वप्रकाशत्व' किया है-स्वप्रकाशत्वं चित्त्वम् (ब्रह्मसूत्र भामतीटीका 1/1/1)। यहाँ स्वयंप्रकाश का अभिप्राय है- किसी अन्य से प्रकाशित न होना, अपितु अपने प्रकाश से सभी को प्रकाशित करना। यही विशेषता वेदान्त के ब्रह्म में विद्यमान है। वह स्वयं प्रकाश है तथा सूर्य आदि तेज-पुञ्जों का भी प्रकाशक है- इस सम्बन्ध में मुण्डकोपनिषद् ब्रह्म को ज्योतिषां ज्योतिः कहता है- हिरण्मये परे कोशे विरज ब्रह्म निष्कलम्। तच्छुभ्रं ज्योतिषां ज्योतिस्तद्यदात्मविदो विदुः॥ (2/2/9) इसप्रकार यहाँ प्रयुक्त 'चित्' शब्द विज्ञान, ज्ञान, चैतन्य एवं स्वप्रकाशत्व आदि अर्थों की प्रतीति कराता है, जो ब्रह्म अथवा आत्मा के वैशिष्ट्य का कथन करते हैं।