भारतकोश
वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished314 पृष्ठ

पृष्ठ 218, कुल 314 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 218

२०१४ वेदान्तसार हैं, किन्तु इनमें अपने-अपने अंश की अधिकता के कारण ही तत्-तत् नाम से उनका व्यवहार किया जाता है एवं तत्-तत् अंश की अधिकता से अपने-अपने गुणों की अनुकूलता के आधार पर ही सम्बन्धित इन्द्रियों द्वारा उसका प्रत्यक्ष किया जाता है। इसीलिए पञ्चीकृत आकाश में शब्द। वायु में शब्द एवं स्पर्श। अग्नि में शब्द, स्पर्श एवं रूप। जल में शब्द, स्पर्श, रूप एवं रस तथा पृथिवी में शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध आदि अपने-अपने कारणों के अनुसार स्पष्टरूप से अनुभव किए जा सकते हैं। विशेष-(1) पञ्चीकरणप्रक्रिया का उल्लेख न तो बादरायण ने शारीरकसूत्रों में किया है और न ही आचार्य शङ्कर ने अपने भाष्य में इसकी चर्चा की है। (2) अपितु सर्वप्रथम इसका वर्णन उत्तरकालीन टीकाकार आनन्दज्ञान ने किया है। (3) इसीकारण पाश्चात्यविद्वान् डयूसन ने उपनिषदों में प्रतिपादित त्रिवृत्करण के सिद्धान्त को भारतीयदर्शनों की विकासपरम्परा में अपेक्षाकृत पूर्व अवस्था का द्योतक स्वीकार किया है। (4) यहाँ प्रयुक्त 'उपलक्षण' से अभिप्राय निर्देशन अथवा संकेतमात्र से ग्रहण करना चाहिए। (5) वैशेष्यात्तद्वादस्तद्वाद न्याय-यदि किसी एक वस्तु में एकाधिक तत्त्व विद्यमान हो तो अधिकता के आधार पर उसका सम्बोधन किया जाता है-इसीको 'वैशेष्यात् तद्वादः' कहा जाएगा। आकाश आदि पञ्चीकृत महाभूतों के नामकरण का भी यही सिद्धान्त आधाररूप में बताया गया है, क्योंकि जिस नाम से महाभूत को जाना जाता है, उसमें उसका आधा भाग विद्यमान रहता है। (6) त्रिवृत्करण को अपेक्षाकृत विस्तारपूर्वक समझने के लिए भूमिका में चित्रसंख्या-12 भी द्रष्टव्य है। अवतरणिका-पञ्चीकरण एवं इसी प्रसङ्ग में त्रिवृत्करण का उल्लेख करने के बाद ग्रन्थकार पञ्चीकरण की प्रक्रिया के पश्चात् उत्पन्न पञ्चमहाभूतों से होने वाली स्थूलसृष्टि का कथन करते हैं- एतेभ्यः पञ्चीकृतेभ्यो भूतेभ्यो भूर्भुवःस्वर्महर्जनस्तपः सत्यमित्येतन्नामकानामुपर्य्युपरिविद्यमानानामतलवितलसुतलरसातलतलातल-