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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished314 पृष्ठ

पृष्ठ 303, कुल 314 में से

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जीवन्मुक्त-निरूपण २८९ “उत्पन्न-आत्म-अवबोधस्य हि अद्वेष्टृत्व-आदयः गुणाः। अयत्नतः भवन्ति अस्य न तु साधनरूपिणः” इति॥37॥ अनुवाद-उससमय अभिमानराहित्य आदि ज्ञान के साधन, द्वेषहीनता आदि सद्गुण आभूषणों के समान (जीवन्मुक्त का) अनुवर्तन करते हैं। इसीलिए कहा गया है- “उत्पन्न हो गया है आत्मज्ञान जिसे, इसके अद्वेष आदि गुण स्वाभाविक हो जाते हैं। वे वस्तुतः साधनरूप नहीं रहते हैं। ‘चन्द्रिका’-जीवन्मुक्त की अवस्था में व्यक्ति को न तो किसी भी विषय में अभिमान ही रहता है और न ही वह वस्तुविशेष या व्यक्तिविशेष के प्रति द्वेष की भावना ही रखता है। इन दोनों गुणों के लिए उसे प्रयास भी नहीं करना पड़ता, अपितु ये उसके स्वभाव में ही विद्यमान रहते हैं, जो वस्तुतः आभूषण के समान उसकी शोभा में वृद्धि करने वाले होते हैं। ये गुण जीवन्मुक्तावस्था में उसके साधन नहीं बनते हैं, अपितु अपने आप उसमें लक्षण के रूप में दिखायी देने लगते हैं। इसी बात को ग्रन्थकार नैष्कर्म्यसिद्धि की कारिका को उद्धृत करते हुए कहते हैं- जिसे आत्मज्ञान की सिद्धि हो गयी है, ऐसे ब्रह्मज्ञानी के लिए द्वेष न करना, अहंकार न करना, दयालुता दिखाना इत्यादि गुण मानो उसका स्वभाव ही हो जाते हैं। उनके लिए उसे किसीप्रकार का कोई प्रयत्न नहीं करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में जीवन्मुक्त के मन में अशुभकर्म करने का विचार भी नहीं आता है, क्योंकि उसे साध्यरूप ब्रह्म की सिद्धि हो जाती है। इसलिए इस अवस्था में उसे ये गुण साधनरूप में आवश्यक प्रतीत भी नहीं होते हैं। कहने का अभिप्राय यह है कि जीवन्मुक्त व्यक्ति में अनहंकार, अद्वेष्टृत्व आदि गुणों की स्थिति, अत्यन्त सहज एवं स्वाभाविक हो जाती है। इनके लिए उसे किसीप्रकार के प्रयत्न की आवश्यकता नहीं रहती है, फिर भला वह अशुभादिकर्म किसप्रकार कर सकता है? विशेष-(1) जीवन्मुक्त व्यक्ति के लिए अहंकारराहित्य एवं द्वेष न करना आदि गुणों की स्वाभाविकस्थिति का कथन किया गया है। (2) गुणों को उसकी शोभा में वृद्धि करने वाले आभूषण बताया गया है, जो अत्यन्त सुन्दर बन पड़ा है।

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