वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished314 पृष्ठ
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जीवन्मुक्त-निरूपण २९३ (4) परमकैवल्य विशुद्ध आनन्दमात्र होने से आनन्दैकरस कहलाता है। (5) यहाँ प्रयुक्त देहयात्रा से अभिप्राय है कि जीवन्मुक्त इन्द्रियों की तृप्ति के लिए प्रारब्धफलों का भोग नहीं करता है, अपितु वह केवल शरीर स्थिति के लिए उनको भोगता है। (6) समुद्र में उठने वाली लहरें जिसप्रकार समुद्र में लीन हो जाती हैं, उसी प्रकार जीवन्मुक्त के प्राण प्रत्यक् अभिन्नपरमात्मा में विलीन होते हैं। सामान्यजीवों के समान ऊर्ध्वगमन नहीं करते हैं। ॥इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यसदानन्दविरचिता वेदान्तसारः समाप्तः॥ ॥इसप्रकार श्रीमद् परमहंस परिव्राजकाचार्य सदानन्द द्वारा विरचित वेदान्तसार समाप्त हुआ॥