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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished314 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 314 में से

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३४ वेदान्तसार अगाधपाण्डित्य की अभिव्यक्ति होती है। एक आत्मपुराण नामक ग्रन्थ भी इनके नाम से मिलता है। इन्होंने अपने ग्रन्थों में सर्वत्र शङ्कराचार्य का ही अनुसरण किया है। (३४) विद्यारण्यमुनि- इनका दूसरा नाम 'माधव' था। ये विजय नगर राज्य के संस्थापक थे। सन् 1336 ई. के लगभग इन्होंने महाराज वीर बुक्क का राजसिंहासन पर अभिषेक किया तथा स्वयं उनके प्रधानमन्त्री बने। ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, क्योंकि ये उच्चकोटि के दार्शनिक, कवि, वैयाकरण, स्मृतिसंग्रहकार और राजनीतिज्ञ थे। प्रसिद्ध विशिष्टाद्वैताचार्य वेदान्तदेशिकाचार्य इनके समकालीन और बालसखा थे। इनका स्थितिकाल विद्वानों ने 1296 ई० से 1386 ई० निर्धारित किया है। लोकमान्यता के अनुसार इनका जन्म तुंगभद्रा नदी के तटवर्ती हाम्पी नगर के पास एक गाँव में हुआ था। इनका सूत्र बोधायन तथा गोत्र भारद्वाज था 'पराशरमाधव' नामक ग्रन्थ के अनुसार इनके पिता का नाम मायण तथा माता का नाम श्रीमती था। सायण और भोगनाथ इनके दो भाई थे। ये दोनों ही भाई अत्यन्त प्रतिभाशाली थे। जिसमें सायण ने वेदों पर विद्वत्तापूर्ण भाष्यों की संरचना की। वृद्धावस्था (1377 ई०) में इन्होंने विद्यारण्यस्वामी के नाम से संन्यास ग्रहण किया। किंवदन्तियों के अनुसार इनकी मृत्यु 90 वर्ष की आयु में हुई। इन्होंने गुरुरूप में विद्यातीर्थ, भारतीतीर्थ एवं शङ्करानन्द को स्मरण किया है।$^1$ अपने जीवनकाल में इन्होंने अनेक ग्रन्थों की रचना की। जिनमें-माधवीयधातुवृत्ति (व्याकरणग्रन्थ), जैमिनीयन्यायमाला एवं उसकी टीका 'विवरण' (पूर्वमीमांसाविषयक ग्रन्थ), पराशरमाधव (स्मृतिशास्त्र- विषयक ग्रन्थ), सर्वदर्शनसंग्रह (समस्त दर्शनों का सारसंग्रह), विवरणप्रमेय- संग्रह (पद्मपादकृत पञ्चपादिकाविवरण की व्याख्या), सूतसंहिता की टीका (स्कन्दपुराण के अन्तर्गत स्थित सूतसंहिता-वेदान्त के सिद्धान्तों की व्याख्या) पञ्चदशी (अद्वैतवेदान्त का प्रकरण ग्रन्थ, 15 प्रकरण, 1500 श्लोकों में निबद्ध), अनुभूति प्रकाश (श्लोकबद्ध उपनिषद् आख्यायिकाएँ), अपरोक्षानुभूति की टीका (शङ्कराचार्य विरचित अपरोक्षानुभूति ग्रन्थ पर वैदुष्यपूर्ण टीका), जीवन्मुक्तिविवेक (संन्यासियों के धर्मों का विस्तृत

  1. पञ्चदशी एवं विवरणप्रमेय संग्रह- मंगलाचरण।