वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara by Sadananda Yogindra
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1940 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ५२ ) वेदान्तसार । तद्गतप्रतिबिम्बिताकाशवच्चाभेदः।एवं सूक्ष्मशरी- रोत्पत्तिः ॥ ५१ ॥ ( सं०टी० ) इहापि विज्ञानमयादिकोशत्रयस्य समष्टिरू- पस्य तदवच्छिन्नसूत्रात्मनश्च व्यष्टिरूपविज्ञानमयादिकोशत्र- यस्य तदवच्छिन्नतैजसचैतन्यस्य च वनवृक्षादि तदवच्छिन्ना- काशादिदृष्टांतमुखेनाऽभेदं दर्शयति । अत्रापीति । समष्टि- व्यष्ट्युपाध्योर्वनवृक्षवज्जलाशयजलवच्चाभेदः उपाधिद्वयाव- च्छिन्नचैतन्ययोः सूत्रात्मतैजसयोरपि वनवृक्षावच्छिन्नाका- शवज्जलाशयजलगतप्रतिबिंबाकाशवच्चाभेद इत्यर्थः। सूक्ष्मश- रीरोत्पत्तिप्रकरणमुपसंहरति । एवमिति ॥ ५१ ॥ ( भा० टी० ) जैसे वन और वृक्ष यह परस्पर विभिन्न नहीं है जैसे वनावच्छिन्न आकाशसे वृक्षावच्छिन्न आकाश कोई विभिन्न नहीं है जैसे तालावका और जलका कोई भेद नहीं है जैसे जलगत प्रतिबिम्बित आकाशकी और जलाशय के प्रतिबिम्बित आकाशकी कोई विभिन्नता नहीं है इसी प्र- कार सूक्ष्म शरीरकी समष्टि और व्यष्टिकी तथा तदुपहित हि- रण्यगर्भ और तैजसकी परस्पर विभिन्नता नहीं है। इसीप्रकार सूक्ष्मशरीरकी उत्पत्ति है ॥ ५१ ॥ स्थूलभूतानि तु पंचीकृतानि । पंचीकरणं तु आ काशादिपंचस्वेकैकं द्विधा समं विभज्य तेषु दशसु भागेषु प्राथमिकान् पंच भागान् प्रत्येकं चतुर्धा समं विभज्य तेषां चतुर्णां भागानां स्वस्वद्विती-