भारतकोश
वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary

भट्ट नारायण द्वारा

DevanagariHindipublished355 पृष्ठ

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३०४ वेणीसंहारं नाटकं

एकं क्षणं.विरम वत्स पिपासितोऽपि
पातुं त्वया सह जवाद्यमागतोऽस्मि ॥ ३० ॥
अथवा सुक्षत्रियाणां गतिमुपगतं वत्समहमुपगतोऽप्यकृती द्रष्टुम् । वत्स
भीमसेन,
मया पीतं पीतं तदनु भवताम्बास्तनयुगं
यदुच्छिष्टैर्वृत्तिं जनयसि रसैर्वत्सलतया ।
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सम्मिलितम्, अस्तु=तिष्ठतु, पिपासितः = तृषितः, अपि, त्वम्, एकम्, क्षणम् =
मुहूर्तम्, विरम = तिष्ठ विलम्बं कुर्वित्यर्थः । त्वया, सह=साकम्, पातुम्, अयम् =
युधिष्ठिरः, ( अहम् ) जवात् = वेगात्, आगतः, कर्तरि क्तप्रत्ययः । अस्मि । वसन्त-
तिलका छन्दः ॥ ३० ॥
सुक्षत्रियाणाम्=वीराणाम्, गतिम् = स्वर्गरूपाम्, उपगतम् = प्राप्तम्, वत्सम्=
भीमम् द्रष्टुम् = विलोकितुम्, अहम् मृतः, अपि अकृतो = अकुशलः, असमर्थ इत्यर्थं
इत्यन्वयः । अस्माकमात्मघातेन वीरगतेरभावादिति भावः ।
अन्वयः—अम्बास्तनयुगम्, मया, पीतम्, तदनु, भवता, पीतम् वत्सलतया
मदुच्छिष्टैः रसैः, वृत्तिम्, जनयसि, तव, मम, वितानेषु, सोमे, च, एवम्, विधिः,
अभूत्, अधुना, कथम्, एवम्, निवापाम्भः, पूर्वम्, त्वम्, पिबसि ॥ ३१ ॥
मयेति । अम्बास्तनयुगम् = मातृस्तनद्वयम्, मया=युधिष्ठिरेण, पीतम्,
तदनुः = तत्पश्चात्, भवता = भीमेन, पीतम्, वत्सलतया = स्नेहेन, मदुच्छिष्टैः =
मद्‌भोजनावशिष्टैः, रसैः = दुग्धादिभिः, वृत्तिम् = जीविकाम्, जनयसि = अजनयः,
एक क्षण के लिए प्रतीक्षा करो तुम्हारे साथ पान करने के लिए अत्यन्त द्रुत गति से मैं आ ही
रहा हूँ ॥ ३० ॥
अथवा वीरसुलभ गति को प्राप्त वत्स भीमसेन के समीप पहुंच कर भी उनके दर्शन से
वञ्चित हो रह जाऊँगा (तात्पर्य यह है कि क्षत्रिय लोग जो युद्ध में प्राण परित्याग करते हैं
उन्हें स्वर्ग होता है और जो आत्महत्या करते हैं वे स्वर्ग के भागी नही होते इसलिए भीम
की गति को तो युधिष्ठिर पा नहीं सकते थे । अतएव उनका भी दर्शन होना उन (युधिष्ठिर)
के लिए कठिन ही था ।
प्रिय भ्रात भीमसेन !
माता के स्तनद्वय का मेरे द्वारा पान कर लेने पर आपने उसका पान किया था ? आप
मेरे जूठे फल-रसादिक (खाद्य तथा पेय पदार्थ) के द्वारा अत्यन्त चाव से अपनी प्राणयात्रा
करते थे । यज्ञों के प्रकरण में सोमरस का पान करने के लिए भी मेरा और आपका
यही नियम था (अर्थात् पहले युधिष्ठिर पी लेते थे तो फिर भीम पान करते थे] फिर