भारतकोश
वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary

भट्ट नारायण द्वारा

DevanagariHindipublished355 पृष्ठ

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पृष्ठ 49

२८ वेणीसंहारं नाटकं भीमसेनः—वत्स, कथं चिरयति पाञ्चाली । सहदेवः—आर्य, का खलु वेलाऽत्रभवत्याः प्राप्तायाः । किन्तु रोषावेश- वशादार्याऽऽगताप्यार्येण नोपलक्षिता । भीमसेनः—(दृष्ट्वा सादरम् ) देवि, वर्धितामर्षैरस्माभिरागतापि भवती नोपलक्षिता । अतो न मन्युं कर्तुमर्हसि । द्रौपदी—णाह, उदासीणेसु तुम्हेसु मह मण्णु. ण उण कुविदेसु । (नाथ, उदासीनेषु युष्मासु मम मन्युः, न पुनः कुपितेषु । ) भीमसेनः—यद्येवमपगतपरिभवमात्मानं समर्थयस्व । ( हस्ते गृहीत्वा, पार्श्वे समुपवेश्य, मुखमवलोक्य । ) किं पुनरत्रभवतीमुद्विग्नामिवोपलक्षयामि। द्रौपदी—णाह, किं वि उव्वेअकालंणं तुम्हेसु सण्णिहिदेसु । ( नाथ, किमप्युद्वेगकारणं युष्मासु सन्निहितेषु । ) कथम् = कस्माद्धेतोः, पाञ्चाली = द्रौपदी, चिरयति = विलम्बं कुरुते । का खलु वेला = चिरकालः । वर्धितामर्षैः = उद्दीपितक्रोधैः । नोपलक्षिता = नावगता । मन्युं = क्रोधम्, 'मन्यु- दैन्ये क्रतौ क्रुधि' इत्यमरः । उदासीनेषु = विषयासक्तेषु ? अपगतपरिभवम् = समाप्ततिरस्कारम् । आत्मानं = स्वम्, समर्थयस्व = अव- गच्छ । उपलक्षयामि = जानामि । युष्मासु = वीरेषु, भवत्सु, सन्निहितेषु = समीपस्थेषु, नतु अन्यत्र गतेषु, किम- भीमसेन—( स्मरणपूर्वक ) प्रिय, क्यों द्रौपदी को विलम्ब हो रहा है युद्ध के लिये शीघ्रातिशीघ्र तय्यार हो जाने के लिए मेरा मन मुझे प्रेरित कर रहा है। सहदेव—आर्य ! श्रीमती जी के आये हुए बहुत विलम्ब हो गया क्रोध के आवेश में पड़ कर आपने इन्हें देखा ही नहीं । भीम—( देखकर आदरपूर्वक र ) देवि ! हम लोगों ने क्रोध के आवेश में होकर नहीं देखा यद्यपि आप सम्मुख खड़ी हैं अतः आप क्रोध न करें । द्रौपदी—नाथ, यदि आप लोग उपेक्षा करके बैठ जाते तो मैं क्रोध करती परन्तु आप लोगों को प्रतिशोध करने के लिए उद्यत देखती हूँ अतः क्रोध कैसा ? भीम—यदि ऐसी बात है तो समझ लीजिये कि आप के अपमान का प्रतिकार हो ही गया । ( हाथ पकड़कर बगल में बैठा लेते हैं और उनके मुख की ओर देखकर ) क्यों आप व्याकुल सी प्रतीत हो रही हैं ? द्रौपदी—स्वामिन्, आप लोगोंके समीप रहते हुए उद्विग्नताका क्या कारण हो सकता है !