विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)
Vidura Niti Gita Press
महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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विदुरनीति
कपटपूर्ण व्यवहार करनेवाले मायावीको वेद पापोंसे मुक्त नहीं करते; किंतु जैसे पंख निकल आनेपर चिड़ियोंके बच्चे घोंसला छोड़ देते हैं, उसी प्रकार वेद भी अन्तकालमें उसे त्याग देते हैं ॥ ४२ ॥
मद्यपानं कलहं पूगवैरं भार्यापत्योरन्तरं ज्ञातिभेदम् । राजद्विष्टं स्त्रीपुंसयोर्विवादं वर्ज्यान्याहुर्यश्च पन्थाः प्रदुष्टः ॥ ४३ ॥
शराब पीना, कलह, समूहके साथ वैर, पति-पत्नीमें भेद पैदा करना, कुटुम्बवालोंमें भेदबुद्धि उत्पन्न करना, राजाके साथ द्वेष, स्त्री और पुरुषमें विवाद और बुरे रास्ते ये सब त्याग देने योग्य बताये गये हैं ॥ ४३ ॥
सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्वं शलाकधूर्तं च चिकित्सकं च । अरिं च मित्रं च कुशीलवं च नैतान् साक्ष्ये त्वधिकुर्वीत सप्त ॥ ४४ ॥
हस्तरेखा देखनेवाला, चोरी करके व्यापार करनेवाला, जुआरी, वैद्य, शत्रु मित्र, और नर्तक—इन सातोंको कभी भी गवाह न बनावे ॥ ४४ ॥
मानाग्निहोत्रमुत मानमौनं मानेनाधीतमुत मानयज्ञः । एतानि चत्वार्यभयंकरणि भयं प्रयच्छन्त्ययथाकृतानि ॥ ४५ ॥