भारतकोश
विज्ञान भैरव तन्त्र (११२ ध्यान धारणाएँ - हिन्दी व्याख्या सहित)

विज्ञान भैरव तन्त्र (११२ ध्यान धारणाएँ - हिन्दी व्याख्या सहित)

Vijnana Bhairava Tantra with Hindi Commentary

भगवान भैरव / प्रो. ब्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास / चौखम्बा · मोतीलाल बनारसीदास / चौखम्बा · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished256 पृष्ठ

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( १४ ) तत्त्व तक पहुँचा जा सकता है ? इसके उत्तर में भगवान् शिव ११२ धारणाओं का उपदेश करते हैं। धारणाओं का वर्गीकरण ११२ धारणाओं को विज्ञानभैरव (श्लोक ११६) में 'निस्तरंग उपदेश' के नाम से कहा गया है। इनके लिये धारणा शब्द का प्रयोग भट्ट आनन्द ने किया है। उन्होंने धारणा शब्द का अर्थ कहीं नहीं दिया। दर्शन ग्रन्थों में इस शब्द के अनेक तरह के अर्थ किये गये हैं। सर्वदर्शनसंग्रह में अन्य अर्थों के साथ एक अर्थ यह भी दिया है कि १नाभिचक्र, हृदय पुण्डरीक, नासाग्र प्रभृति आध्यात्मिक स्थानों में, हिरण्यगर्भ, इन्द्र, प्रजापति प्रभृति इष्ट देवों के सकल स्वरूप में अथवा बाह्य देश में अन्य सभी विषयों से हटाकर चित्त को स्थिर करना ही धारणा कहलाती है। विज्ञानभैरव की धारणाओं में इस लक्षण की पूरी संगति बैठती है। प्रत्यभिज्ञा दर्शन में स्वात्मस्वरूप की प्रत्यभिज्ञा (पहचान) के लिये चार उपाय वर्णित हैं। ये हैं—आणव, शाक्त, शाम्भव उपाय और चौथा अनुपाय। टीकाकारों ने प्रायः सभी धारणाओं का इन्हीं चार उपायों में समावेश किया है। वास्तव में देखा जाय तो इसमें प्रायः सभी पूर्ववर्ती यौगिक पद्धतियों का सुन्दर संग्रह किया गया है। भगवद्गीता और त्रिपिटकों में प्रतिपादित प्राणापान२ प्रक्रिया आदि का, ३शून्यवाद और ४विज्ञानवाद का, ५कुल और ६क्रम दर्शन में प्रकाशित योग विधियों का ही नहीं, ७शब्दयोग, ८नादयोग, ९हठयोग में प्रद- शित विधियों का ही नहीं, अपितु १०बालकों की चक्करघानी, ११क्रान्तिकारियों की सी सहन- १. “नाभिचक्र-हृदयपुण्डरीक-नासाग्रादावाध्यात्मिके हिरण्यगर्भ-वासव-प्रजापतिप्रभृतिके बाह्ये वा देशे चित्तस्य विषयान्तरपरिहारेण स्थिरीकरणं धारणा” (आनन्दाश्रम संस्करण, पृ० १४०)। २. धारणा संख्या १-४, २८-२९, ४१ देखिये। ३. धारणा संख्या २०-२३, ३४, ६४, ६७, ७७, ९४, ९६ द्रष्टव्य। ४. धारणा संख्या ७४ देखिये। ५. धारणा संख्या ६५-६६ द्रष्टव्य। ६. धारणा संख्या ५३-५८ देखिये। ७. धारणा संख्या १७-१८ देखिये। ८. धारणा संख्या १५-१६, १९ द्रष्टव्य। ९. धारणा संख्या ३, ८, १३-१४, ५२, ८८ द्रष्टव्य। १०. धारणा संख्या ८६ देखिये। ११. धारणा संख्या ६८ द्रष्टव्य।