भारतकोश
विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

Vikramankadeva Charitam of Bilhana with Commentary

महाकवि बिल्हण / पं. विश्वनाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished493 पृष्ठ

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पृष्ठ 169

( १४४ ) भाषा प्रसूति घरमे जाने के बाद वहाँ रानी की प्रसव वेदना को कम करने के ध्येय से मन्त्रजप करने में ओठ के हिलने से उसकी फैलने वाली कान्ति से युक्त जप करने वालो के ऐसे तेज जलने वाले दीपो के भी मानो जप करते रहने पर, दासियो के, नवजात बच्चे वाली पालतू हथिनी को भी प्रसव वेदना कम होकर पुत्र उत्पन्न होने का उपाय पूछने के लिए, उत्कण्ठित होने पर (राजा को पुत्र हुआ यह ८५ श्लोक के वाक्य से सम्बद्ध है ।) निखातरक्षौषधिगेहदेहली-समीपसज्जीकृतशस्त्रपाणिषु । इतस्ततस्त्राटनमक्षतोत्करैर्विधाय हुँकारिषु मन्त्रवादिषु ॥८३॥ अन्वयः निखातरक्षौषधिगेहदेहलीसमीपसज्जीकृतशस्त्रपाणिषु मन्त्रवादिषु अक्षतो- त्करैः इतः ततः त्राटनं विधाय हुँकारिषु (सत्सु) (नृपतेर्नन्दनोऽजायते- त्यनेनाऽन्वयः । ) व्याख्या निखाता गर्त विधाय तत्र निक्षिप्ता रक्षाया बालरक्षाया ओषधयो भेषजानि यस्या सा चासौ गेहदेहली सूतिकागृहावग्रहणी 'गृहावग्रहणी देहली' इत्यमर । तस्यास्समीपे सज्जीकृताः स्थापिताः शस्त्र पाणौ येषा ते सशस्त्रमनुष्या यैस्तेषु मन्त्रवादिषु मन्त्रपाठकेष्वक्षतोत्करैरभिमन्त्रिताक्षतसमूहैरितस्ततस्त्राटनं रक्षाविधि- विशेष "मन्त्राक्षतान्परितो विक्षिप्य तान्त्रिकैर्बालरक्षार्थं क्रियमाणोऽनर्थनिवारण- विधिविशेषस्त्राटनम्" विधाय सम्पाद्य हुँकारिषु हुंकारशब्द कुर्वत्सु सत्सु । (नृपतेर्नन्दनोऽजायतेति सम्बन्धः) भाषा गड्ढा खोदकर जहाँ प्रसूतिरक्षा की ओषधियां गाड़ी हुई थीं ऐसी प्रसूतिघर की देहली के पास सशस्त्र मनुष्यो को बैठाने वाले मान्त्रिको के इधर उधर मन्त्राक्षतो को फेंककर त्राटनविधि करने हुँकार शब्द करते रहने पर (राजा को पुत्र हुआ ।) गृहोदरस्थे जरतीपरिग्रहे किमप्युपांशु स्वमतोपदेशिनि । वितीर्णकर्णासु निवासपञ्जरादनल्पशोकासु शुकाङ्गनास्वपि ॥८४॥