भारतकोश
विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

Vikramankadeva Charitam of Bilhana with Commentary

महाकवि बिल्हण / पं. विश्वनाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished493 पृष्ठ

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( ४६ ) तन्नाम राजा च बभूव । हारीतो मानव्यश्च तद्वंशमूलपुरुषौ बभूवतुरित्यर्थः । मानं व्ययतः इति मानव्यो, विपूर्वकं अव् गतो धातौर्विचि लोपोव्योर्वलीति वकारस्य लोपे सिद्धम् । भाषा जिस चालुक्य वंश में आदि पुरुष हारीत नाम का हुआ जो विपक्षी राजाओं की आश्चर्यजनक कीर्ति का अपहरण करने वाला था । अभिमानी मानव्य नाम का राजा भी उसी वंश में हुआ जिसने शत्रुओं के अभिमान को तोड़ दिया था । मीलद्विलासालकपल्लवानि विशीर्णपत्रावलिमण्डनानि । मुखानि वैरिप्रमदाजनस्य यद्द्भूततीनां जगदुः प्रतापम् ॥५६॥ अन्वयः मीलद्विलासालकपल्लवानि विशीर्णपत्रावलिमण्डनानि वैरिप्रमदाजनस्य मुखानि यद्द्भूततीनां प्रतापं जगदुः । व्याख्या मीलद्विलासा विलासरून्या सत्कारशून्या अलकपल्लवाः केशपाशा येषां तानि विशोर्णानि जीर्णानि *पत्रावलिरूपमण्डनानि शोभावर्द्धकानि येषु तानि वैरिणां शत्रूणा प्रमदाजनस्य स्त्रीसमूहस्य मुखान्याननानि (कर्तृ) यस्य चालुक्य- वंशस्य भूपतीनां राज्ञां प्रताप प्रभावं जगदुरूचुः । वैरिरत्रीणामलङ्काराभावा- त्यतीनां मरणं सूच्यते । भाषा शत्रुओं की स्त्रियों के सत्कार शून्य केशपाशों से युक्त तथा खण्डित पत्रावलि से युक्त मुख, उस चालुक्य वंश के राजाओं के प्रताप को कह रहे थे । अर्थात् प्रकट कर रहे थे । अर्थात् निकट भूत में पतियों के मारे जाने से विधवा हो

  • शोभा के लिये रंगबिरंगी वस्तुओं से मुखादि अगों पर निकाली हुई चित्रकारी ।
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