विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 110, कुल 475 में से
संदर्भ में पढ़ेंविनय-पत्रिका ९९ कानोंमें कुण्डल, ललाटपर तिलक है; आपकी भौंहें अत्यन्त सुन्दर हैं और लाल कमलके समान बड़े-बड़े अरुणारे नेत्र हैं। आपकी तिरछी चितवन तीनों लोकों- का शोक हरनेवाली है; आप शिवजीके हृदय-रूपी मानसरोवरमें विचरण करने- वाले हंसरूप हैं ॥३॥ आपकी नासिका और कपोल सुन्दर हैं, दाँत हीरेकी तरह शुभ्र और चमकीले हैं, अधरोंकी लालिमा पके हुए बिम्बाफलके समान हैं, मुस- कान मधुर है, कण्ठ शंखके समान है, चिबुक सुन्दर और वाणी अत्यन्त गम्भीर है। आप सत्य-संकल्प और देवताओंके भयका नाश करनेवाले हैं ॥४॥ आपके हृदयपर नवीन तुलसीदलसंयुक्त सुन्दर रंग-बिरंगे पुष्पोंकी कोमल वनमाला सुशोभित है और उस मालाकी सुगंधसे दीवाने भ्रमरोंका समूह आमोदवश अत्यन्त मधुर गुंजार करता हुआ घूम रहा है ॥५॥ आपके हृदयपर सुन्दर श्रीवत्सका चिह्न है, बाहुओंपर अंगद या विजयठ, हाथोंमें कंकण, गलेमें हार और कटि भागमें करधनी मधुर ध्वनि कर रही है। सिंहासनपर आपके वाम भागमें जानकी- जी बैठी हैं; ऐसा जान पड़ता है मानो तमाल वृक्षके समीप कोमल सुवर्ण-लता शोभित हो रही है ॥६॥ घुटनेतक लम्बे आपके हाथ हैं; आपके बायें हाथमें धनुष तथा दाहिने हाथमें एक बाण है। आपको सम्पूर्ण मुनि-वृन्द, देवता, सिद्ध, श्रेष्ठ गन्धर्व, मनुष्य, नाग और अनेक रजवाड़े प्रणाम करते हैं ॥७॥ आप निष्पाप, अविच्छिन्न, सर्वज्ञ, सबके स्वामी, हम लोगोंको निश्चयपूर्वक सब प्रकारका कल्याण देनेवाले तथा भक्तोंके प्रणाम करते ही उनके कष्टोंको दूर करनेकी विद्या- में निपुण हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी ! मैं आपको लक्ष्मणजीके सहित नमस्कार करता हूँ ॥८॥ आपके युगल चरणकमल सुखके घर तथा लक्ष्मीजीके निवास-स्थान हैं। बज्र आदि चिह्नोंके कारण आपके चरणोंकी शोभा ही निराली है। आपके जिन चरणोंने हनुमान्जीके हृदयको उत्तम मन्दिर बनाकर पवित्र किया है, यह तुलसी- दास सदैव उन शोकहारी चरणोंकी शरणमें हैं ॥९॥ विशेष १—'तारुण्यतनु' का अर्थ वियोगी हरिजी तथा अन्य कई टीकाकारोंने 'तरुण शरीरवाले' लिखा है; पर यह अर्थ ठीक नहीं। क्योंकि श्रीरामजी सदैव किशोरावस्थामें रहते हैं और शिवजी युवावस्थामें—ऐसा उल्लेख पाया जाता है। गोस्वामीजीने भी 'विनय' के ६२ वें पदमें लिखा है:—