विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 111, कुल 475 में से
संदर्भ में पढ़ें१०० विनय-पत्रिका "बिसद किसोर, पीन, सुन्दर वपु, स्याम सुरुचि अधिकाई।" २—'वनमाल'—कमल, कुंद, पारिजात, मंदार और तुलसीकी पैरोंतक लटकती हुई मालाका नाम वनमाला है। ३—'चिह्न कुलिसादि'—भगवान्के दाहिने चरणमें २४ और वाम चरणमें २४, कुल ४८ चिह्न हैं। भारतेन्दु हरिश्चन्द्रजीने इन चिह्नोंका वर्णन इस प्रकार किया हैः— स्वस्तिक ऊरध रेख कोन अठ श्रीहल-मूसल। अहि वाणाम्बर वज्र सु-रथ यव कंज अष्टदल ॥ कल्पवृक्ष ध्वज चक्र मुकुट अंकुश सिंहासन। छत्र चँवर यम-दंड माल यवकी नरको तन ॥ चौबीस चिह्न ये रामपद प्रथम सुलच्छन जानिये। 'हरिश्चंद' सोई वामपद जानि ध्यान उर आनिये ॥ सरयू गोपद महि जम्बू घट जय पताक दर। गदा अर्ध ससि तिल त्रिकोन षटकोन जीव वर ॥ शक्ति सुधा सर त्रिबलि मीन पूरन ससि वीना। वंशी धनु पुनि हंस तून चन्द्रिका नवीना ॥ श्रीराम-वाम पद चिह्न सुभ ए चौबिस शिव-उक्त सब। सोइ जनकनन्दिनी दक्ष पद भजु सब तजु 'हरिचंद' अब ॥
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देव— कोसलाधीस, जगदीस, जगदेक हित, अमित गुन विपुल विस्तार लीला। गायन्ति तव चरित सुपवित्र स्रुति-सेष-सुक- संभु-सनकादि मुनि मननसीला ॥ १ ॥ वारिचर-वपुष धरि भक्त-निस्तारपर, धरिनिकृत नाव महिमाति गुर्वी।