भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariAwadhipublished475 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 475 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 116

विनय-पत्रिका १०५ ( ५३ ) देव— सकल सौभाग्यप्रद सर्वतोभद्र-निधि सर्व, सर्वेश, सर्वाभिरामं। सर्व-हृदि-कंज-मकरंद-मधुकर रुचिर, रूप, भूपालमनि नौमि रामं ॥१॥ सर्वसुख-धाम गुनग्राम, विश्रामप्रद, नाम सर्वास्पदं अति पुनीतं । निर्मलं, सांत, सुविसुद्ध, बोधायतन, क्रोध-मद-हरनं, करुना-निकेतं ॥२॥ अजित, निरुपाधि, गोतीतमव्यक्त, विभु- मेकमनवद्यमजमद्वितीयं । प्राकृतं, प्रगट परमातमा, परमहित, प्रेरकानंत वंदे तुरीयं ॥३॥ भूधरं, सुन्दरं, श्रीवरं, मदन-मद- मथन सौन्दर्य-सीमातिरम्यं । दुष्प्राप्य, दुष्प्रेक्ष्य, दुस्तर्क्य, दुष्पार, संसारहर, सुलभ, मृदुभाव-गम्यं ॥४॥ सत्यकृत, सत्यरत, सत्यव्रत, सर्वदा, पुष्ट, संतुष्ट, संकष्टहारी । धर्म वर्मनि ब्रह्मकर्मबोधैक, विप्र पूज्य, ब्रह्मण्यजनप्रिय, मुरारी ॥५॥ नित्य, निर्मम, नित्यमुक्त, निर्मान, हरि, ज्ञानघन, सच्चिदानंद मूलं । सर्वरक्षक सर्वभक्षकाध्यक्ष, कूटस्थ, गूढ़ार्चि भक्तानुकूलं ॥६॥