विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 128, कुल 475 में से
संदर्भ में पढ़ेंविनय-पत्रिका ११७ शब्दार्थ - दुर्देोष = बुरे ऐव, बड़े दुर्गुण। दमभवन = बाह्येन्द्रिय निग्रह। दुःखौघहर = दुःख-समूहको हरनेवाले। भूरि = बहुत । भुवनेस = ब्रह्मा आदि। भव = शिवजी । मुग्ध = मूढ़। मानाथ = (मा+नाथ) लक्ष्मीके पति । पानी = पाणि, हाथ । अनिकेत = गृहरहित । अनामय = रोगादि रहित । अंभोदनाद = मेघनाद । मामुर्विपति = (माम् + उर्वि + पति) पृथिवीपति मुझे । भावार्थ - हे देव ! आप दैत्योंके नाशकर्ता, दयाके समुद्र, दम्भ-विनाशक, महान्-दोषोंको भस्म करनेवाले तथा महान्-पापोंको हरनेवाले हैं। आप दुष्टताका दमन करनेवाले, इन्द्रिय-निग्रहके स्थान (जितेन्द्रियोंमें श्रेष्ठ); दुःखसमूहको हरने- वाले और कठिन दुर्वासनाओंके नाशकर्ता हैं ॥१॥ आप बहुत-से आभूषणोंको धारण करनेवाले, सूर्यके समान प्रभावान्, ऐश्वर्यवाले, संसारके जन्म-मरणका भंजन करके अभयवर देनेवाले तथा ब्रह्मा आदिसे भी बड़े हैं। आप भावनाओं- से परे, शिवजी द्वारा वन्दनीय, शिवभक्तोंके हितकारी, पृथिवीका उद्धार करनेवाले तथा गिरिवर-(गोवर्द्धन) धारी हैं ॥२॥ हे विभो ! आप वरदाता, मेघकी आभा- वाले, वाणीसे परे, विश्वकी आत्मा, विरक्त, वैकुण्ठ-मन्दिर-विहारी, आकाशकी तरह घट-घटमें व्यापक, वन्दनीय, वामन, ब्रह्म (वेद) वेत्ता, साक्षात् ब्रह्म, और चिन्ताओंको दूर करनेवाले हैं ॥३॥ आप सहज (स्वाभाविक ही) सुन्दर हैं, आपका सुन्दर मुख है और मन भी सुन्दर है। आप सदैव मंगळरूप, शुद्ध, और सर्वज्ञ तथा स्वच्छन्द विचरण करनेवाले हैं। आप सब कुछ करनेवाले, सबका भरण-पोषण करनेवाले, सर्वजित्, सबके हितू, सत्य-संकल्प तथा प्रलय करनेवाले हैं ॥४॥ आप नित्य हैं, मोह-रहित हैं, निर्गुण हैं, निरंजन हैं, अपनेमें ही आनन्द करनेवाले हैं, मोक्ष-स्वरूप हैं और मुक्तिदाता हैं। आप पूर्ण आनन्दरूप, अचल, मर्यादा-रहित, सर्वदा मुक्त, उपाधि-रहित तथा सबके विधानकर्ता या उत्पादक हैं ॥५॥ आप बड़े-बड़े कल्याणोंके आदिकारण, आनन्द और महिमाके घर, मूढ़ मधु दैत्यको मारनेवाले, सम्मानदाता तथा स्वयं मान-रहित हैं। आप कामदेवके नाशक, मदसे परे, माया-रहित, मनोहारिणी लक्ष्मीजीके स्वामी तथा हाथमें कमल लिये रहनेवाले हैं ॥६॥ आप कमलनेत्र हैं, कलाओंके भाण्डार हैं, धनुषधारी कोशलाधीश हैं, कल्याण-राशि हैं, अगणित राक्षसरूपी मतवाले हाथियोंके लिए सिंह हैं तथा भक्तोंके मनरूपी पवित्र वनमें निवास करनेवाले