विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ विनय-पत्रिका वरद, वनदाम, वागीस, विस्वात्मा, विरज, वैकुंठ-मन्दिर-बिहारी । व्यापकं व्योम, वंदारु, वामन, विभो, ब्रह्मविद् , ब्रह्म, चिंतापहारी ॥३॥ सहज सुंदर, सुमुख, सुमन, सुभ सर्वदा, सुद्ध सर्वज्ञ, स्वच्छंदचारी । सर्वकृत, सर्वभृत, सर्वजित, सर्वहित, सत्य-संकल्प, कल्पांतकारी ॥४॥ नित्य, निर्मोह, निर्गुन, निरंजन, निजानंद निर्वान, निर्वानदाता । निर्भरानंद, निःकंप, निःसीम, निर्मुक्त, निरुपाधि, निर्मम, विधाता ॥५॥ महामंगलमूल, मोद-महिमायतन, मुग्ध-मधु-मथन, मानद, अमानी । मदनमर्दन, मदातीत, मायारहित, मंजु मानाथ, पाथोज-पानी ॥६॥ कमल-लोचन, कलाकोस, कोदंडधर, कोसलाधीस, कल्यानरासी । जातुधान-प्रचुर मत्तकरि-केसरी, भक्तमन-पुन्य-आरन्यवासी ॥७॥ अनघ, अद्वैत, अनवद्य, अव्यक्त, अज, अमित, अविकार आनंदसिंधो । अचल, अनिकेत, अविरल, अनामय, अनारंभ, अंभोदनादहन-बंधो ॥८॥ दास तुलसी खेद खिन्न, आपन्न इह, सोक-संपन्न, अतिसय सभीतं । प्रनत पालक राम, परम करुनाधाम, पाहि मामुर्विपति, दुर्विनीतं ॥९॥