भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 33

२२ विनय-पत्रिका करनेवाली हो । तड़ित = बिजली । भीमासि = दुर्गा हो । रामासि = लक्ष्मी हो । वामासि = स्त्रीस्वरूपा हो । षन्मुख = कार्त्तिकेय । हेरंब = गणेशजी । कुंभीस = गजराज । केसरिनि = सिंहिनी । गुर्वि = बहुत बड़ा । उर्विधर = शेषनाग । भावार्थ—हे असह्य दोषों और दुःखोंका नाश करनेवाली देवि ! मुझपर दया करो । तुम विश्व-ब्रह्माण्डकी आदिस्थान हो, भक्तोंपर कृपा करनेवाली हो, हाथमें त्रिशूल धारण किये रहती हो और मायाकी जन्मदात्री आद्या-शक्ति हो ॥१॥ तुम्हारे सुन्दर शरीरके अंग-प्रत्यंगमें बिजली-सी चमक शोभा पा रही है, तुम्हारे वस्त्र दिव्य हैं (अर्थात् वे वस्त्र न कभी गन्दे होते हैं और न पुराने ही) और भव्य आभूषण तुम्हारे शरीरपर विराजमान हैं । हे मृगशावक और खंजनके समान मनोहर नेत्रवाली ! हे चन्द्रमुखी ! तुम्हें देखकर करोड़ों रति और कामदेव लज्जित होते हैं ॥२॥ तुम रूप, मुख और शीलकी सीमा हो । तुम्हीं भीमा नाम दुर्गा हो और तुम्हीं लक्ष्मी हो; तुम हो तो स्त्री-स्वरूपा, पर तुम वाणी और बुद्धिमें श्रेष्ठ हो । तुम कार्त्तिकेय और गणेशजीकी माता हो, जगज्जननी हो और शिवजीकी पत्नी हो । हे भवानी ! तुम्हारी जय हो, जय हो ! ॥३॥ तुम चंड नामक दैत्यके भुजदण्डोंको टुकड़े-टुकड़े करनेवाली हो और महिषासुरको मारनेवाली हो । मुण्ड नामक राक्षसके घमण्डको चूरकर तुमने उसके अंग-अंगको तोड़ डाला था । शुम्भ और निशुम्भ गजराजोंको युद्धमें मारनेके लिए तुम सिंहिनी हो । तुमने अपने क्रोधरूपी समुद्रमें शत्रुके झुंडको डुबो दिया है ॥४॥ वेद-शास्त्र और हजार जीभवाले शेष तुम्हारा गुण गाते हैं, किन्तु तुम्हारे अगम यानी अपार गुणका पार पाना बड़ा कठिन है । हे माता ! तुम मुझे ऐसा प्रण और प्रेम दो, जिसमें मैं अपना यह नेम बना लूँ कि श्रीरामचन्द्रजी श्याम घन हैं और तुलसीदास पपीहा है । विशेष १—'भीमा'—नाम दुर्गाका है । यथा:— तदा मां मुनयः सर्वे स्तोष्यन्त्यानम्रमूर्त्तयः । भीमा देवीति विख्यातं तन्मे नाम भविष्यति ॥ इति मार्कण्डेयपुराणे देवीमाहात्म्ये ।

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