भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 351

३४० विनय-पत्रिका शुद्ध-बुद्ध आनन्दघन परमात्माकी ही सेवा करनी चाहिये। जो आदमी ऐसा करता है, वही इस एकादशीके व्रतका फल पाता है, और उसका आवागमन (जन्म-मरण) से छुटकारा हो जाता है॥१२॥ द्वादशीके समान बारहवाँ साधन यह है कि ऐसा दान दो कि जिससे तीनों लोकोंमें कोई भय न रह जाय। परोपकार- में रत रहना ही (एकादशी व्रतके बाद द्वादशीका) वह पारण है जिससे फिर कभी शोक नहीं व्यापता ॥१३॥ तेरसके समान तेरहवाँ यत्न यह है कि जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति इन तीनों अवस्थाओंको त्यागकर भगवान्‌का भजन करना चाहिये। क्योंकि वह मन, कर्म और वाणीसे परे हैं—इन्द्रियोंके विषय नहीं हैं— सबमें व्याप्त हैं और स्वयं ही व्याप्य हैं (अर्थात् व्याप्य और व्यापक दोनों वही हैं) तथा अनन्त हैं ॥१४॥ चतुर्दशीके समान चौदहों भुवनोंमें चर और अचर- रूप भगवान् श्रीकृष्ण ही हैं; किन्तु भेदभाव (मेरा-तेरा) दूर हुए बिना रघुनाथ- जी संसारके गहन जालको नहीं काटते। तात्पर्य यह है कि 'मेरा-तेरा' भाव दूर करो, तंव ईश्वर-कृपा होगी ॥१५॥ पूर्णिमाके समान पन्द्रहवाँ साधन यह है कि सिद्धा प्रेमा भक्तिका रस है (इस रसका आविर्भाव तब होता है, जब ऊपर कहे हुए सब साधन सम्पन्न हो जाते हैं)। इस भगवद्दर्शनरूपी रसको केवल ईश्वरके वे अनन्य भक्त जानते हैं, जो समदर्शी, शीतल (शान्त), अहंकार-रहित, ज्ञान-रत तथा सब विषयोंसे उदासीन हैं ॥१६॥ (गुसाईंजीने मनुष्योंके कल्याणके लिए पहले प्रेम, साधन और भक्तिका उल्लेख किया है और अन्तमें अनेक साधनोंके द्वारा उसे सिद्धाभक्तितक पहुँचा दिया है। फागुनकी पूर्णिमा और चैत्रकी प्रतिपदाके सन्धिकालमें होलिकादहन होता है; अतः वहाँ सांसारिक भाव- के नाश और परमात्माके दर्शनकी उत्सुकताके बीचका समय ही सन्धिकाल है। उसी सन्धिकालमें पूर्णिमाके समान सिद्धाभक्तिकी) होलीमें दैहिक, दैविक और भौतिक—इन तीन प्रकारके दुःखोंको जलाकर अच्छी तरह फाग खेलना चाहिये (आनन्द मनाना चाहिये)। यदि तू अपने हृदयमें परमानन्द चाहता है, तो इस मार्गपर चल (ऊपर कहे हुए पन्द्रह साधनोंको क्रम-क्रमसे साध) ॥१७॥ वेदों, पुराणों और पण्डितोंसे सम्मत परमात्माके चरित ही होलीके गीत हैं। इसपर विचार करके संसारसे तर जाना चाहिये और फिर कभी यमदूतोंके फेरमें नहीं पड़ना चाहिये ॥१८॥ संशयोंका नाश करनेवाले,

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