भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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( २ ) पद पृष्ठ पद पृष्ठ कहे बिनु रह्यो न परत ४२२ जयति सच्चिद्व्यापकानन्द ७३ कह्यो न परत, बिनु कहे न रह्यो ४३० जयति अंजनी-गर्भ-अंभोधि ४० कहाँ कवन मुँह लाइकै २६५ जयति जय सुरसरी २७ काजु कहा नर-तनु धरि सारचो ३३५ जयति जय सत्रु करि-केसरी ६९ काहेको फिरत मन करत जयति निर्भरानन्द संदोह ५३ बहु जतन ३२८ जयति बात-संजात ४९ काहे को फिरत मूढ़ मन धायो ३३२ जयति भूमिजा रमन ६७ काहे ते हरि मोहिं बिसारो १७९ जयति मङ्गलागार ४७ काहे न रसना रामहि गावहि ३८९ जयति मर्कटाधीस ४४ कीजै मोको जम-जातनामई २९५ जयति लछमनानन्त भगवंत ६५ कृपासिन्धु जन दीन दुवारे २५९ जयति राज राजेन्द्र राजीवलोचनराम ७७ कृपासिन्धु ताँते रहौं निसिदिन २६४ जाउँ कहाँ, ठौर है कहाँ ४४७ कृपा सो धौं कहाँ बिसारी राम १७७ जाउँ कहाँ तजि चरन तिहारे १९२ केसव कहि न जाइ का कहिये २०४ जाके गति है हनुमानकी ५५ केसव कारन कौन गुसाईं २०५ जाके प्रिय न राम-बैदेही २९९ केहू भाँति कृपासिन्धु मेरी ३०७ जाको हरि दृढ़ करि अंग करयो ३९२ कैसे देउँ नाथहिं खोरि २७८ जागु जागु जीव जड़ जोहै १५३ को जाँचिये सम्भु तजि आन ३ जाँचिये गिरिजापति, कासी ७ कौन जतन बिनती करिये ११४ जानकी जीवन जग जीवन १५९ कोसलाधीस जगदीस जगदेक १०० जानकी जीवनकी बलि जैहाँ १९५ खोटो खरो रावरो हौ १५६ जानकीनाथ रघुनाथ ९७ गरैगी जीह जो कहौं और को हौं ३८० जानकीस की कृपा जगावती १५४ गाइये गणपति जगबन्दन १ जानत प्रीति रीति रघुराई २८६ जनम गयो बादिहिं बर बीति ३८६ जानि पहिचानि मैं बिसारे हौं ४२४ जमुना ज्यों ज्यों लागी बाढ़न ३१ जिय जब तें हरि ते बिलगान्यो २३४ जय जय जग-जननि देवि २३ जैसो हौं तैसो राम ४४३ जय जय भगीरथ नन्दिनि २५ जो अनुराग न राम सनेही सों ३२६