विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपदोंकी वर्णनानुक्रमिक सूची पद पृष्ठ पद पृष्ठ अकारन को हितू और को है ३८१ और कहँ ठौर रघुबंसमनि ३५२ अजहुँ आपने रामके करतब ३२४ और काहिँ माँगिये १६२ अति आरत अति स्वारथी ६० और मोहि को है काहि कहिहौँ ३८३ अब चित चेति चित्रकूटहिं चलु ३७ कछु है न आइ गयो जनम जाइ १६५ अब लौं नसानी, अब न नसैहौ १९६ कटु कहिये गाढ़े परे ६१ अस कछु समुझि परत रघुराया २१८ कबहिँ देखाइहौ हरि, चरन ३६५ आपनो कबहुँ करि जानिहौ ३७२ कबहुँक अम्ब, अवसर पाइ ७१ आपनो हित रावरे सों जोपै सूझै ३९० कबहुँक हौँ यहि रहनि रहौँगो २९६ इहै कह्यो सुत बेद चहूँ १६९ कबहुँ कृपा करि रघुबीर ४४२ इहै जानि चरनन्हि चित लायो ४०० कबहुँ रघुबंस मनि, सो कृपा ३५३ इहै परम फलु परम बड़ाई १३५ कबहुँ समय सुधि द्याइबी ७२ ईस सीस बससि ३० कबहुँ सो कर-सरोज रघुनायक २४८ एक सनेही सांचिलो ३२२ कबहू मन विश्राम न मान्यो १७१ एकै दानि-सिरोमनि साँचो २८४ करिय सँभार कोसलराय ३६८ ऐसी आरती-राम रघुबीरकी ८५ कलि नाम कामतरु रामको २७५ ऐसी कौन प्रभुकी रीति ३५८ कस न करहु करुना हरे २०२ ऐसी तोह्नि न बूझिये हनुमान हठीले ५८ कस न दीन पर द्रबहु उमावर ८ ऐसी मूढ़ता या मनकी १७३ कहा न कियो, कहाँ न गयो ४५० ऐसी हरि करत दास पर प्रीति १८४ कहाँ जाउँ, कासों कहौँ, और ऐसे राम दीन-हितकारी २८९ ठौर, न मेरे २६६ ऐसेहि जनम-समूह सिराने ३८७ कहाँ जाउँ, कासों कहौँ कौन ऐसेहुँ साहबकी सेवा १५१ सुनै दीन की ३०४ ऐसो को उदार जगमाहीं २८३ कहु केहि कहिय कृपानिधे २०३