भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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( ४ ) पद पृष्ठ पद पृष्ठ नाथ सों कौन बिनती कहि भलो भली भाँति है १४९ सुनावौँ ३४९ भानुकुल कमल-रवि ९३ नाथ कृपा ही को पंथ ३७० भीषणकार भैरव भयंकर १४ नाथ नीके कै जानिबी ४३२ मंगल मूरति मारुत-नन्दन ६२ नाम, राम रावरोई हित मेरे ३७७ मन इतनोई या तनुको १३९ नाहिंन आवत आन भरोसो २९७ मन पछितैहै अवसर बीते ३३१ नाहिंन चरन-रति ३२९ मन माधव को नेकु निहारहि १६८ नाहिन और कोड सरन लायक ३४५ मन मेरे मानहि सिख मेरी २२२ नाहिनै नाथ अवलम्ब ३५० मनोरथ मनको एकै भाँति ३८५ नौमि नारायनं, नरं करुनायनं १२८ महाराज रामादयो धन्य सोई १९७ पन करिहौं हठि आजु तें ४३८ माधव जू मो-सम मन्द न कोऊ १७६ पवन-सुवन रिपु-दवन ४५४ माधव, अब न द्रवहु केहि लेखे २०७ पावन प्रेम राम चरन कमल २२६ माधव, मो समान जगमाहीं २०८ पाहि पाहि राम, पाहि रामभद्र ४०९ माधव,मोह-फाँस क्यों टूटै २०९ प्रिय राम-नाम तें जाहि न रामो ३७८ माधव असि तुम्हारि यह माया २१० बन्दौं रघुपति करुना निधान १४१ मारुति मन रुचि भरतकी ४५६ बलि जाउँ हौं राम गुसाँई ३२७ मेरी न बनै बनाये मेरे कोटि ४२९ बलि जाउँ और कासों कहौं ३७१ मेरे रावरियै गति है रघुपति २७३ बाप ! आपने करत मेरी घनी ४१५ मेरो कह्यो सुनि पुनि भावै ४३३ बारक बिलोकि बलि कीजै ३०५ मेरो भलो कियो राम १५२ बावरो रावरो नाह भवानी ५ मेरो मन हरि जू हठ न तजै १७२ भजिबे लायक, सुखदायक ३४८ मैं केहि कहौं बिपति अति भारी २२१ भयेहू उदास राम मेरे आस मैं जानी हरि-पद-रति नाहीं २२३ रावरी ३०३ मैं तोहिं अब जान्यो संसार ३१६ भरोसो जाहि दूसरो सो करो ३७६ मैं हरि पतित-पावन सुने २८० भरोसो और आइहै उर ताके ३७४ मैं हरि साधन करइ न जानी २१७ भली भाँति पह्चाने जाने ४११ मोह-जनित मल लागि १६४