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विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariAwadhipublished475 पृष्ठ

( ४ ) पद पृष्ठ पद पृष्ठ नाथ सों कौन बिनती कहि भलो भली भाँति है १४९ सुनावौँ ३४९ भानुकुल कमल-रवि ९३ नाथ कृपा ही को पंथ ३७० भीषणकार भैरव भयंकर १४ नाथ नीके कै जानिबी ४३२ मंगल मूरति मारुत-नन्दन ६२ नाम, राम रावरोई हित मेरे ३७७ मन इतनोई या तनुको १३९ नाहिंन आवत आन भरोसो २९७ मन पछितैहै अवसर बीते ३३१ नाहिंन चरन-रति ३२९ मन माधव को नेकु निहारहि १६८ नाहिन और कोड सरन लायक ३४५ मन मेरे मानहि सिख मेरी २२२ नाहिनै नाथ अवलम्ब ३५० मनोरथ मनको एकै भाँति ३८५ नौमि नारायनं, नरं करुनायनं १२८ महाराज रामादयो धन्य सोई १९७ पन करिहौं हठि आजु तें ४३८ माधव जू मो-सम मन्द न कोऊ १७६ पवन-सुवन रिपु-दवन ४५४ माधव, अब न द्रवहु केहि लेखे २०७ पावन प्रेम राम चरन कमल २२६ माधव, मो समान जगमाहीं २०८ पाहि पाहि राम, पाहि रामभद्र ४०९ माधव,मोह-फाँस क्यों टूटै २०९ प्रिय राम-नाम तें जाहि न रामो ३७८ माधव असि तुम्हारि यह माया २१० बन्दौं रघुपति करुना निधान १४१ मारुति मन रुचि भरतकी ४५६ बलि जाउँ हौं राम गुसाँई ३२७ मेरी न बनै बनाये मेरे कोटि ४२९ बलि जाउँ और कासों कहौं ३७१ मेरे रावरियै गति है रघुपति २७३ बाप ! आपने करत मेरी घनी ४१५ मेरो कह्यो सुनि पुनि भावै ४३३ बारक बिलोकि बलि कीजै ३०५ मेरो भलो कियो राम १५२ बावरो रावरो नाह भवानी ५ मेरो मन हरि जू हठ न तजै १७२ भजिबे लायक, सुखदायक ३४८ मैं केहि कहौं बिपति अति भारी २२१ भयेहू उदास राम मेरे आस मैं जानी हरि-पद-रति नाहीं २२३ रावरी ३०३ मैं तोहिं अब जान्यो संसार ३१६ भरोसो जाहि दूसरो सो करो ३७६ मैं हरि पतित-पावन सुने २८० भरोसो और आइहै उर ताके ३७४ मैं हरि साधन करइ न जानी २१७ भली भाँति पह्चाने जाने ४११ मोह-जनित मल लागि १६४

( ५ ) पद पृष्ठ पद पृष्ठ माहतम तरनि हर रुद्र ११ राम राखिये सरन ४१७ मोहिं मूढ़ मन बहुत बिगोयो ४०३ राम रावरो नाम मेरो ४१८ यह बिनती रघुबीर गुसाईं १९४ राम, रावरो नाम साधु सुरतरु ४१९ याहि तैं मैं हरि ज्ञान गँवायो ४०१ राम कबहुँ प्रिम लागिहौ ४४१ यों मन कबहुँ तुमहिं न लाग्यो २९४ राम राय बिनु रावरे ४५२ रघुपति भगति करत कठिनाई २९१ रावरी सुधारी जो बिगारी ४२६ रघुपति बिपति दवन ३५५ रुचिर रसना तू रामराम २२४ रघुबर रावरि यहै बड़ाई २८८ लाज न लागत दास कहावत ३१३ रघुबरहिं कबहुँ मन लागि है ३७३ लाभ कहा मानुष तनु पाये ३३४ राख्यो राम सुस्वामी सों ३०१ लाल लाड़िले लषन ६३ राम राम रमु, राम राम रटु १४३ लोक-बेदहूँ बिदित बात ४०४ रामजपु, रामजपु रामजपु बावरे १४४ बिरद गरीष निवाज रामको १८४ राम राम जपु जिय सदा १४५ बिस्व-बिख्यात, बिस्वेस १०८ राम राम राम जीह जौ लौं १४७ बिस्वास एक राम-नाम को २७४ राम भलाई अपनी भल कियो २७१ बीर महा अवराधिये २०१ रामभद्र मोहिं आपनो सोच २६८ श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन ८० राम ! प्रीती की रीति आप ३०९ श्रीरघुबीरकी यह बानि ३६१ राम-नामके जपे जाइ जियकी श्री हरि-गुरुपद-कमल भजहु ३३७ जरनि ३११ सकल सुखकंद, आनंद बन १०१ राम कहत चलु, राम कहत चलु ३१७ सकल सौभाग्यप्रद १०५ रामको गुलाम, नाम १५७ सकुचत हौं अतिराम २५४ रामसे प्रीतम की प्रीति रहित २२७ संकरं संप्रदं सज्जनानन्ददं १६ राम सनेही सों तैं न सनेह २३१ सदा राम जपु, राम जपु ८२ रामचन्द्र रघुनायक तुमसों २५३ सन्त-संताप हर, विश्व ११२ रामराम, रामराम, रामराम, जपत २२५ सब सोच बिमोचन चित्रकूट ३५ राम जपु जीह ! जानि, प्रीति सों ४०५ समरथ सुवन समीरके ५९ राम रावरो सुभाउ गुन सील ४१३ सहज सनेही रामसों तैं ३२०

( ६ ) पद पृष्ठ | पद पृष्ठ साहिब उदास भये दास खास ४२८ | हरति सब आरती आरती रामकी ८७ सिव सिव होइ प्रसन्न १० | हरनि पाप त्रिविध ताप २९ सुनु मन मूढ़ सिखावन मेरो १७० | हरि सम आपदा-हरन ३५६ सुनि सीतापत्ति सील सुभाउ १८८ | हरि तजि और भजिये काहि ३६३ सुनहु राम रघुबीर गुसाईं २५६ | हरि तुम बहुत अनुग्रह कीन्हों १९३ सुमिरु सनेह सों तू नाम १४८ | हे हरि, कवन दोष तोहिं दीजै २११ सुमिरु सनेह-सहित सीतापत्ति २२३ | हे हरि कवन जतन सुख मानहुँ २१२ सेइये सुसाहिब राम सो २७७ | हे हरि कवन जतन भ्रम भागै २१३ सेइय सहित सनेह देह-भरि ३२ | हे हरि कस न हरहु भ्रम भारी २१४ सेवहु सिव चरन सरोज रेनु १८ | हे हरि यह भ्रमकी अधिकाई २१५ सोइ सुकृती सुचि साँचो ३९४ | है नीको मेरो देवता २०० सो धौं को जो नाम लाज तें २५८ | है प्रभु मेरोई सब दोषु २७९ हौं सब बिधि राम रावरो २६२