विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
( ६ ) पद पृष्ठ | पद पृष्ठ साहिब उदास भये दास खास ४२८ | हरति सब आरती आरती रामकी ८७ सिव सिव होइ प्रसन्न १० | हरनि पाप त्रिविध ताप २९ सुनु मन मूढ़ सिखावन मेरो १७० | हरि सम आपदा-हरन ३५६ सुनि सीतापत्ति सील सुभाउ १८८ | हरि तजि और भजिये काहि ३६३ सुनहु राम रघुबीर गुसाईं २५६ | हरि तुम बहुत अनुग्रह कीन्हों १९३ सुमिरु सनेह सों तू नाम १४८ | हे हरि, कवन दोष तोहिं दीजै २११ सुमिरु सनेह-सहित सीतापत्ति २२३ | हे हरि कवन जतन सुख मानहुँ २१२ सेइये सुसाहिब राम सो २७७ | हे हरि कवन जतन भ्रम भागै २१३ सेइय सहित सनेह देह-भरि ३२ | हे हरि कस न हरहु भ्रम भारी २१४ सेवहु सिव चरन सरोज रेनु १८ | हे हरि यह भ्रमकी अधिकाई २१५ सोइ सुकृती सुचि साँचो ३९४ | है नीको मेरो देवता २०० सो धौं को जो नाम लाज तें २५८ | है प्रभु मेरोई सब दोषु २७९ हौं सब बिधि राम रावरो २६२