भारतकोश
विष्णु पुराण

विष्णु पुराण

Vishnu Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 558 में से

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पृष्ठ 185
१७४* श्रीविष्णुपुराण *[ अ० २

तेषामिन्द्रश्च भविता शान्तिर्नाम महाबलः।<br/>सप्तर्षयो भविष्यन्ति ये तथा ताञ्छृणुष्व ह॥ २६<br/>हविष्मान्सुकृतस्सत्यस्तपोमूर्तिस्तथापरः।<br/>नाभागोऽप्रतिमौजाश्च सत्यकेतुस्तथैव च॥ २७<br/>सुक्षेत्रश्चोत्तमौजाश्च भूरिषेणादयो दश।<br/>ब्रह्मसावर्णिपुत्रास्तु रक्षिष्यन्ति वसुन्धराम्॥ २८<br/>एकादशश्च भविता धर्मसावर्णिको मनुः॥ २९<br/>विहङ्गमाः कामगमा निर्वाणरतयस्तथा।<br/>गणास्त्वेते तदा मुख्या देवानां च भविष्यताम्।<br/>एकैकस्त्रिंशकस्तेषां गणश्चेन्द्रश्च वै वृषः॥ ३०<br/>निःस्वरश्चाग्नितेजाश्च वपुष्मान्घृणिरारुणिः।<br/>हविष्माननघश्चैव भाव्याः सप्तर्षयस्तथा॥ ३१<br/>सर्वत्रगस्सुधर्मा च देवानीकादयस्तथा।<br/>भविष्यन्ति मनोस्तस्य तनयाः पृथिवीश्वराः॥ ३२<br/>रुद्रपुत्रस्तु सावर्णिर्भविता द्वादशो मनुः।<br/>ऋतुधामा च तत्रेन्द्रो भविता शृणु मे सुरान्॥ ३३<br/>हरिता रोहिता देवास्तथा सुमनसो द्विज।<br/>सुकर्माणः सुरापाश्च दशकाः पञ्च वै गणाः॥ ३४<br/>तपस्वी सुतपाश्चैव तपोमूर्तिस्तपोरतिः।<br/>तपोधृतिर्ध्रुतिश्चान्यः सप्तमस्तु तपोधनः।<br/>सप्तर्षयस्त्विमे तस्य पुत्रानपि निबोध मे॥ ३५<br/>देववानुपदेवश्च देवश्रेष्ठादयस्तथा।<br/>मनोस्तस्य महावीर्या भविष्यन्ति महानृपाः॥ ३६<br/>त्रयोदशो रुचिर्नामा भविष्यति मुने मनुः॥ ३७<br/>सुत्रामाणः सुकर्माणः सुधर्माणस्तथामराः।<br/>त्रयस्त्रिंशद्द्विभेदास्ते देवानां यत्र वै गणाः॥ ३८<br/>दिवस्पतिर्महावीर्यस्तेषामिन्द्रो भविष्यति॥ ३९<br/>निर्मोहस्तत्त्वदर्शी च निष्प्रकम्प्यो निरुत्सुकः।<br/>धृतिमानव्ययश्चान्यस्सप्तमस्सुतपा मुनिः।<br/>सप्तर्षयस्त्वमी तस्य पुत्रानपि निबोध मे॥ ४०<br/>चित्रसेनविचित्राद्या भविष्यन्ति महीक्षितः॥ ४१ | | महाबलवान् शान्ति उनका इन्द्र होगा तथा उस समय जो सप्तर्षिगण होंगे उनके नाम सुनो—॥ २६॥ उनके नाम हविष्मान्, सुकृत, सत्य, तपोमूर्ति, नाभाग, अप्रतिमौजा और सत्यकेतु हैं॥ २७॥ उस समय ब्रह्मसावर्णिमनुके सुक्षेत्र, उत्तमौजा और भूरिषेण आदि दस पुत्र पृथिवीकी रक्षा करेंगे॥ २८॥<br/><br/>ग्यारहवाँ मनु धर्मसावर्णि होगा। उस समय होनेवाले देवताओंके विहंगम, कामगम और निर्वाणरति नामक मुख्य गण होंगे—इनमेंसे प्रत्येकमें तीस-तीस देवता रहेंगे और वृष नामक इन्द्र होगा॥ २९-३०॥ उस समय होनेवाले सप्तर्षियोंके नाम निःस्वर, अग्नितेजा, वपुष्मान्, घृणि, आरुणि, हविष्मान् और अनघ हैं। तथा धर्मसावर्णि मनुके सर्वत्रग, सुधर्मा और देवानीक आदि पुत्र उस समयके राज्याधिकारी पृथिवीपति होंगे॥ ३१-३२॥<br/><br/>रुद्रपुत्र सावर्णि बारहवाँ मनु होगा। उसके समय ऋतुधामा नामक इन्द्र होगा तथा तत्कालीन देवताओंके नाम ये हैं सुनो—॥ ३३॥ हे द्विज! उस समय दस-दस देवताओंके हरित, रोहित, सुमना, सुकर्मा और सुराप नामक पाँच गण होंगे॥ ३४॥ तपस्वी, सुतपा, तपोमूर्ति, तपोरति, तपोधृति, तपोद्युति तथा तपोधन—ये सात सप्तर्षि होंगे। अब मनुपुत्रोंके नाम सुनो—॥ ३५॥ उस समय उस मनुके देववान्, उपदेव और देवश्रेष्ठ आदि महावीर्यशाली पुत्र तत्कालीन सम्राट् होंगे॥ ३६॥<br/><br/>हे मुने! तेरहवाँ रुचि नामक मनु होगा। इस मन्वन्तरमें सुत्रामा, सुकर्मा और सुधर्मा नामक देवगण होंगे इनमेंसे प्रत्येकमें तैंतीस-तैंतीस देवता रहेंगे; तथा महाबलवान् दिवस्पति उनका इन्द्र होगा॥ ३७-३९॥ निर्मोह, तत्त्वदर्शी, निष्प्रकम्प, निरुत्सुक, धृतिमान्, अव्यय और सुतपा—ये तत्कालीन सप्तर्षि होंगे। अब मनुपुत्रोंके नाम भी सुनो॥ ४०॥ उस मन्वन्तरमें चित्रसेन और विचित्र आदि मनुपुत्र राजा होंगे॥ ४१॥

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