भारतकोश
विष्णु पुराण

विष्णु पुराण

Vishnu Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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पृष्ठ 315
३०४* श्रीविष्णुपुराण *[ अ० २४

[मूल संस्कृत]

ततश्च शिशुनाभः ॥ ९ ॥ तत्पुत्रः काकवर्णो भविता ॥ १० ॥ तस्य च पुत्रः क्षेमधर्मा ॥ ११ ॥ तस्यापि क्षतौजाः ॥ १२ ॥ तत्पुत्रो विधिसारः ॥ १३ ॥ ततश्चाजातशत्रुः ॥ १४ ॥ तस्मादर्भकः ॥ १५ ॥ तस्माच्चोदयनः ॥ १६ ॥ तस्मादपि नन्दिवर्द्धनः ॥ १७ ॥ ततो महानन्दी ॥ १८ ॥ इत्येते शैशुनाभा भूपालास्त्रीणि वर्षशतानि द्विषष्ट्यधिकानि भविष्यन्ति ॥ १९ ॥

महानन्दिनस्ततश्शूद्रागर्भोद्भवोऽतिलुब्धोऽतिबलो महापद्मनामा नन्दः परशुराम इवापरोऽखिलक्षत्रान्तकारी भविष्यति ॥ २० ॥ ततः प्रभृति शूद्रा भूपाला भविष्यन्ति ॥ २१ ॥ स चैकच्छत्रामनुल्लङ्घितशासनों महापद्मः पृथिवीं भोक्ष्यते ॥ २२ ॥ तस्याप्यष्टौ सुतास्सुमाल्याद्या भवितारः ॥ २३ ॥ तस्य महापद्मस्यनु पृथिवीं भोक्ष्यन्ति ॥ २४ ॥ महापद्मपुत्राश्चैकं वर्षशतमवनीपतयो भविष्यन्ति ॥ २५ ॥ ततश्च नव चैतान्नन्दान् कौटिल्यो ब्राह्मणस्समुद्धरिष्यति ॥ २६ ॥ तेषामभावे मौर्याः पृथिवीं भोक्ष्यन्ति ॥ २७ ॥ कौटिल्य एव चन्द्रगुप्तमुत्पन्नं राज्येऽभिषेक्ष्यति ॥ २८ ॥

तस्यापि पुत्रो बिन्दुसारो भविष्यति ॥ २९ ॥ तस्याप्यशोकवर्द्धनस्ततस्सुयशास्ततश्च दशरथस्ततश्च संयुतस्ततश्शालिशूकस्तस्मात्सोमशर्मा तस्यापि सोमशर्मणश्शतधन्वा ॥ ३० ॥ तस्यापि बृहद्रथनामा भविता ॥ ३१ ॥ एवमेते मौर्य्या दश भूपतयो भविष्यन्ति अब्दशतं सप्तत्रिंशदुत्तरम् ॥ ३२ ॥ तेषामन्ते पृथिवीं दश शुङ्गा भोक्ष्यन्ति ॥ ३३ ॥ पुष्यमित्रस्सेनापतिस्स्वामिनं हत्वा राज्यं करिष्यति तस्यात्मजोऽग्निमित्रः ॥ ३४ ॥ तस्मात्सुज्येष्ठस्ततो वसुमित्रस्तस्मादप्युदंकस्ततः पुलिन्दकस्ततो घोषवसुस्तस्मादपि वज्रमित्रस्ततो


[हिन्दी अनुवाद]

नन्दीका पुत्र शिशुनाभ होगा, शिशुनाभका काकवर्ण, काकवर्णका क्षेमधर्मा, क्षेमधर्माका क्षतौजा, क्षतौजाका विधिसार, विधिसारका अजातशत्रु, अजातशत्रुका अर्भक, अर्भकका उदयन, उदयनका नन्दिवर्द्धन और नन्दिवर्द्धनका पुत्र महानन्दी होगा। ये शिशुनाभवंशीय नृपतिगण तीन सौ बासठ वर्ष पृथिवीका शासन करेंगे ॥ ९—१९ ॥

महानन्दीके शूद्राके गर्भसे उत्पन्न महापद्म नामक नन्द दूसरे परशुरामके समान सम्पूर्ण क्षत्रियोंका नाश करनेवाला होगा। तबसे शूद्रजातीय राजा राज्य करेंगे। राजा महापद्म सम्पूर्ण पृथिवीका एकच्छत्र और अनुल्लङ्घित राज्य-शासन करेगा। उसके सुमाली आदि आठ पुत्र होंगे जो महापद्मके पीछे पृथिवीका राज्य भोगेंगे ॥ २०—२४ ॥ महापद्म और उसके पुत्र सौ वर्षतक पृथिवीका शासन करेंगे। तदनन्तर इन नवों नन्दोंको कौटिल्य नामक एक ब्राह्मण नष्ट करेगा, उनका अन्त होनेपर मौर्य नृपतिगण पृथिवीको भोगेंगे। कौटिल्य ही [मुरा नामकी दासीसे नन्दद्वारा] उत्पन्न हुए चन्द्रगुप्तको राज्याभिषिक्त करेगा ॥ २५—२८ ॥

चन्द्रगुप्तका पुत्र बिन्दुसार, बिन्दुसारका अशोकवर्द्धन, अशोकवर्द्धनका सुयशा, सुयशाका दशरथ, दशरथका संयुत, संयुतका शालिशूक, शालिशूकका सोमशर्मा, सोमशर्माका शतधन्वा तथा शतधन्वाका पुत्र बृहद्रथ होगा। इस प्रकार एक सौ तिहत्तर वर्षतक ये दस मौर्यवंशी राजा राज्य करेंगे ॥ २९—३२ ॥ इनके अनन्तर पृथिवीमें दस शुंगवंशीय राजागण होंगे ॥ ३३ ॥ उनमें पहला पुष्यमित्र नामक सेनापति अपने स्वामीको मारकर स्वयं राज्य करेगा, उसका पुत्र अग्निमित्र होगा ॥ ३४ ॥ अग्निमित्रका पुत्र सुज्येष्ठ, सुज्येष्ठका वसुमित्र, वसुमित्रका उदंक, उदंकका पुलिन्दक, पुलिन्दकका घोषवसु, घोषवसुका वज्रमित्र, वज्रमित्रका