विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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अ० २३, २४ ] * चतुर्थ अंश * ३०३
तेईसवाँ अध्याय
मगधवंशका वर्णन
| श्रीपराशर उवाच | श्रीपराशरजी बोले— |
|---|---|
| मागधानां बार्हद्रथानां भाविनामनुक्रमं कथयिष्यामि ॥ १ ॥ अत्र हि वंशे महाबलपराक्रमा जरासन्धप्रधाना बभूवुः ॥ २ ॥ | अब मैं मगधदेशीय बृहद्रथकी भावी सन्तानका अनुक्रमसे वर्णन करूँगा ॥ १ ॥ इस वंशमें महाबलवान् और पराक्रमी जरासन्ध आदि राजागण प्रधान थे ॥ २ ॥ |
| जरासन्धस्य पुत्रः सहदेवः ॥ ३ ॥ सहदेवात्सोमापिस्तस्य श्रुतश्रवास्तस्याप्ययुतायुस्ततश्च निरमित्रस्तत्तनयस्सुनेत्रस्तस्मादपि बृहत्कर्मा ॥ ४ ॥ ततश्च सेनजित्ततश्च श्रुतञ्जयस्ततो विप्रस्तस्य च पुत्रश्शुचिनामा भविष्यति ॥ ५ ॥ तस्यापि क्षेम्यस्ततश्च सुव्रतस्सुव्रताद्धर्म्मस्ततस्सुश्रवाः ॥ ६ ॥ ततो दृढसेनः ॥ ७ ॥ तस्मात्सुबलः ॥ ८ ॥ सुबलात्सुनीतो भविता ॥ ९ ॥ ततस्सत्यजित् ॥ १० ॥ तस्माद्विश्वजित् ॥ ११ ॥ तस्यापि रिपुञ्जयः ॥ १२ ॥ इत्येते बार्हद्रथा भूपतयो वर्षसहस्रमेकं भविष्यन्ति ॥ १३ ॥ | जरासन्धका पुत्र सहदेव है ॥ ३ ॥ सहदेवके सोमापि नामक पुत्र होगा, सोमापिके श्रुतश्रवा, श्रुतश्रवाके अयुतायु, अयुतायुके निरमित्र, निरमित्रके सुनेत्र, सुनेत्रके बृहत्कर्मा, बृहत्कर्माके सेनजित्, सेनजित्के श्रुतंजय, श्रुतंजयके विप्र तथा विप्रके शुचि नामक एक पुत्र होगा ॥ ४–५ ॥ शुचिके क्षेम्य, क्षेम्यके सुव्रत, सुव्रतके धर्म, धर्मके सुश्रवा, सुश्रवाके दृढसेन, दृढसेनके सुबल, सुबलके सुनीत, सुनीतके सत्यजित्, सत्यजित्के विश्वजित् और विश्वजित्के रिपुंजयका जन्म होगा ॥ ६–१२ ॥ इस प्रकारसे बृहद्रथवंशीय राजागण एक सहस्र वर्षपर्यन्त मगधमें शासन करेंगे ॥ १३ ॥ |
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेऽंशे त्रयोविंशोऽध्यायः ॥ २३ ॥
चौबीसवाँ अध्याय
कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार
| श्रीपराशर उवाच | श्रीपराशरजी बोले— |
|---|---|
| योऽयं रिपुञ्जयो नाम बार्हद्रथोऽन्त्यस्तस्यामात्यो सुनिको नाम भविष्यति ॥ १ ॥ स चैनं स्वामिनं हत्वा स्वपुत्रं प्रद्योतनामानमभिषेक्ष्यति ॥ २ ॥ तस्यापि बलाकनामा पुत्रो भविता ॥ ३ ॥ ततश्च विशाखयूपः ॥ ४ ॥ तत्पुत्रो जनकः ॥ ५ ॥ तस्य च नन्दिवर्द्धनः ॥ ६ ॥ ततो नन्दी ॥ ७ ॥ इत्येतेऽष्टत्रिंशदुत्तरमब्दशतं पञ्च प्रद्योताः पृथिवीं भोक्ष्यन्ति ॥ ८ ॥ | बृहद्रथवंशका रिपुंजय नामक जो अन्तिम राजा होगा उसका सुनिक नामक एक मन्त्री होगा। वह अपने स्वामी रिपुंजयको मारकर अपने पुत्र प्रद्योतका राज्याभिषेक करेगा। उसका पुत्र बलाक होगा, बलाकका विशाखयूप, विशाखयूपका जनक, जनकका नन्दिवर्द्धन तथा नन्दिवर्द्धनका पुत्र नन्दी होगा। ये पाँच प्रद्योतवंशीय नृपतिगण एक सौ अड़तीस वर्ष पृथिवीका पालन करेंगे ॥ १–८ ॥ |