विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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३१२ * श्रीविष्णुपुराण * [ अ० २४
| ये साम्प्रतं ये च नृपा भविष्याः<br>प्रोक्ता मया विप्रवरोग्रवीर्याः।<br>एते तथान्ये च तथाभिधेयाः<br>सर्वे भविष्यन्ति यथैव पूर्वे ॥ १५० | हे विप्रवर! वर्तमान और भविष्यत्कालीन जिन-जिन महावीर्यशाली राजाओंका मैंने वर्णन किया है ये तथा अन्य लोग भी पूर्वोक्त राजाओंकी भाँति कथामात्र शेष रहेंगे ॥ १५० ॥ |
| एतद्विदित्वा न नरेण कार्यं<br>ममत्वमात्मन्यपि पण्डितेन।<br>तिष्ठन्तु तावत्तनयात्मजाद्याः<br>क्षेत्रादयो ये च शरीरिणोऽन्ये ॥ १५१ | ऐसा जानकर पुत्र, पुत्री और क्षेत्र आदि तथा अन्य प्राणी तो अलग रहें, बुद्धिमान् मनुष्यको अपने शरीरमें भी ममता नहीं करनी चाहिये ॥ १५१ ॥ |
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेऽंशे चतुर्विंशोऽध्यायः ॥ २४ ॥
इति श्रीपराशरमुनिविरचिते श्रीविष्णुपरत्वनिर्णायके श्रीमति
विष्णुमहापुराणे चतुर्थोऽंशः समाप्तः।