विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋचो यजूंषि सामानि | १ | २२ | ८३ | एकश्चात्र महाभाग | २ | ४ | ७४ |
| ऋचः स्तुवन्ति पूर्वाह्ने | २ | ११ | १० | एकपादं द्विपादं च | ६ | ७ | ५९ |
| ऋतावुपेगमश्शस्तः | ३ | ११ | ११४ | एकानेकस्वरूपाय | १ | २ | ३ |
| ऋतुपर्णपुत्रस्सर्वकामः | ४ | ४ | ३८ | एकार्णवे तु त्रैलोक्ये | १ | ३ | २४ |
| ऋतेऽमरगिरेर्मेरोः | २ | ८ | १९ | एकान्तिनः सदा ब्रह्म | १ | ६ | ३९ |
| ऋतेषु कक्षेषु स्थण्डिलेषु० | ४ | १९ | २ | एकाग्रचेताः सततम् | १ | १२ | ३० |
| ऋतेपोरन्तिनारः | ४ | १९ | ३ | एकादशश्च भविता | ३ | २ | २९ |
| ऋत्विक्सवश्रेय० | ३ | १५ | ३ | एकादशे तु त्रिशिखः | ३ | ३ | १४ |
| ऋभूर्नामाभवत्पुत्रः | २ | १५ | ३ | एका लिङ्गे गुदे तिस्रः | ३ | ११ | १८ |
| ऋभूरस्मि तवाचार्यः | २ | १५ | ३४ | एका वंशकरमेकम् | ४ | ४ | ३ |
| ऋभुवर्षसहस्रे तु | २ | १६ | १ | एकावयवसूक्ष्मांशः | ५ | ७ | ६४ |
| ऋषयस्ते ततः प्रोचुः | ६ | २ | ३१ | एकार्णवे ततस्तस्मिन् | ६ | ४ | ४ |
| ऋषभाद्भरतो जज्ञे | २ | १ | २८ | एकांशेन स्थितो विष्णुः | १ | २२ | २६ |
| ऋषिकुल्याकुमाराद्याः | २ | ३ | १४ | एकेनांशेन ब्रह्मासौ | १ | २२ | २४ |
| ऋषिणा यस्तदा गर्भः | १ | १५ | ४८ | एकैकमेव ताः कन्याः | ५ | ३१ | १९ |
| ऋषिभ्यस्तु सहस्राणाम् | २ | ७ | १० | एकैकमस्रं शस्त्रं च | ५ | ३० | ५८ |
| ऋषियोंऽद्य महामेरोः | ३ | ५ | ४ | एकैकं सप्तधा चक्रे | १ | २१ | ४० |
| ऋषीणां नामधेयानि | १ | ५ | ६५ | एकोऽग्निरादावभवत् | ४ | ६ | ९४ |
| ए० | एकोद्दिष्टमयो धर्मः | ३ | १३ | २६ | |||
| एकमस्य व्यतीतं तु | १ | ३ | २७ | एकोद्दिष्टविधानेन | ३ | १३ | २७ |
| एकविंशमथर्वाणम् | १ | ५ | ५६ | एकोऽर्घ्यस्तत्र दातव्यः | ३ | १३ | २४ |
| एकस्मिन् यत्र निधनम् | १ | १३ | ७४ | एको वेदश्चतुर्धा तु | ३ | ३ | २० |
| एकदा तु त्वरायुक्तः | १ | १५ | २४ | एको व्यापी समः शुद्धः | २ | १४ | २९ |
| एकदा तु स धर्मात्मा | १ | १७ | ११ | एकं तवैतद्भूतात्मन् | ३ | १७ | १५ |
| एकदा तु मया पृष्टम् | ३ | ७ | १२ | एकं वर्षसहस्रम् | ४ | १० | १० |
| एकदा तु समं स्नातौ | ३ | १८ | ५७ | एकं त्वमग्र्यं परमं पदं यत् | ५ | १ | ४६ |
| एकदा तु दुहितुस्नेह० | ४ | २ | १०१ | एकं भद्रासनादीनाम् | ६ | ७ | ३९ |
| एकदा तु किञ्चित् | ४ | ४ | ५९ | एकः समस्तं यदिहास्ति | २ | १६ | २३ |
| एकदा त्वम्भोनिधितीरसंश्रयः | ४ | १३ | १२ | एतत्ते कथितं ब्रह्मन् | १ | ९ | १४८ |
| एकदा तु विना रामम् | ५ | ७ | १ | एतद्राजासनम् | १ | ११ | ९ |
| एकदा रैवतोद्याने | ५ | ३६ | ११ | एतन्मे क्रियतां सम्यक् | १ | ११ | ४२ |
| एकदा वर्तमानस्य | ६ | ६ | १३ | एतज्जजाप भगवान् | १ | ११ | ५६ |
| एकचक्रो महाबाहुः | १ | २१ | ५ | एतद्ब्रह्मपराख्यं वै | १ | १५ | ५९ |
| एकप्रमाणमेवैषः | २ | ८ | ४३ | एतत्सर्वं महाभाग | १ | १६ | ११ |
| एकस्वरूपभेदश्च | २ | १४ | ३३ | एतन्निशम्य दैत्येन्द्रः | १ | १७ | १६ |
| एक आसीद्यजुर्वेदः | ३ | ४ | ११ | एतच्चान्यच्च सकलम् | १ | १९ | ३२ |
| एकरात्रस्थितिर्गृहे | ३ | ९ | २८ | एतद्विजानता सर्वम् | १ | १९ | ४८ |
| एकवस्त्रधरोऽथार्द्र० | ३ | ११ | ७९ | एतच्छ्रुत्वा तु कोपेन | १ | १९ | ५० |
| एकश्चतुर्द्धा भगवान्हुताशः | ५ | १ | ४४ | एतदण्डकटाहेन | २ | ७ | २२ |
| एकस्मिन्नेव गोविन्दः | ५ | ३१ | १७ | एतद्विवेकविज्ञानम् | २ | १४ | ३ |
| एकश्शुद्धोऽक्षरो नित्यः | ६ | ४ | ३६ | एतस्मिन्परमार्थज्ञः | २ | १४ | ६ |