विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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४७८ * श्रीविष्णुपुराण *
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| एतत्तु श्रोतुमिच्छामि | ... | ३ | ३ | २ | एते सप्त मया लोकाः | ... | २ |
| एतद्ब्रह्म त्रिधा भेदम् | ... | ३ | ३ | २९ | एते वसन्ति वै चैत्रे | ... | २ |
| एतत्ते कथितं सर्वम् | ... | ३ | ६ | ३३ | एते मया ग्रहाणां वै | ... | २ |
| एतन्मुने समाख्यातम् | ... | ३ | ७ | ३९ | एते लूनशिखास्तस्य | ... | २ |
| एतच्च श्रुत्वा प्रणम्य | ... | ४ | २ | २७ | एतेषां यस्य यो धर्मः | ... | ३ |
| एतदिन्द्रस्य स्वपद० | ... | ४ | ९ | २३ | एते नग्नास्तवाख्याताः | ... | ३ |
| एतद्धि मणिरत्नमात्म० | ... | ४ | १३ | १५४ | एते पाषण्डिनः पापाः | ... | ३ |
| एतच्च सर्वकालम् | ... | ४ | १३ | १५५ | एते वैशालिका भूभृतः | ... | ४ |
| एतदिच्छाम्यहं श्रोतुम् | ... | ४ | १५ | ३ | एते क्षत्रप्रसूताः | ... | ४ |
| एतत्तवाखिलं मयाभिहितम् | ... | ४ | १५ | १६ | एते च मयैव | ... | ४ |
| एतद्विदित्वा न नरेण कार्यम् | ... | ४ | २४ | १५१ | एते चात्मधर्मपरित्यागात् | ... | ४ |
| एतस्मिन्नेव काले तु | ... | ५ | १ | १२ | एते इक्ष्वाकुभूपालाः | ... | ४ |
| एतदर्थं तु लोकेऽस्मिन् | ... | ५ | ७ | ९ | एते काण्वायनाश्च | ... | ४ |
| एतन्मम मतं गोपाः | ... | ५ | १० | ४१ | एते च तुल्यकालास्सर्वे | ... | ४ |
| एतत्कृतं महेन्द्रेण | ... | ५ | ११ | १४ | एतेन क्रमयोगेन | ... | ४ |
| एतस्मिन्नन्तरे प्राप्तः | ... | ५ | २७ | २५ | एते चान्ये च भूपालाः | ... | ४ |
| एतत्पश्यामि ते रूपम् | ... | ५ | ३० | २३ | एते तस्याप्रमेयस्य | ... | ५ |
| एतत्सर्वं महाभाग | ... | ५ | ३२ | १० | एते वयं वृत्ररिपुस्तथायम् | ... | ५ |
| एतस्मिन्नेव काले तु | ... | ५ | ३३ | ५ | एते यमास्सनियमाः | ... | ६ |
| एतद्वः कथितं विप्राः | ... | ६ | २ | ३० | एतौ हि गजराजानौ | ... | २ |
| एतत्सर्वमिदं विश्वम् | ... | ६ | ७ | ६० | एरका तु गृहीता वै | ... | ५ |
| एतत्ते यन्मयाख्यातम् | ... | ६ | ८ | १२ | एलापुत्रस्तथा नागः | ... | १ |
| एतत्संसारभीरूणाम् | ... | ६ | ८ | ४१ | एवमत्यन्तवैशिष्ट्य० | ... | ६ |
| एताश्च सह यज्ञेन | ... | १ | ६ | २७ | एवमन्तर्जले विष्णुम् | ... | ५ |
| एता युगाद्याः कथिताः पुराणे | ... | ३ | १४ | १३ | एवमुक्तस्तया शौरी | ... | ५ |
| एतानि सृष्ट्वा भगवान् | ... | १ | ५ | ४७ | एवमाज्ञापयन्तं तु | ... | ५ |
| एतानियोजयेच्छ्राद्धे | ... | ३ | १५ | ४ | एवमस्तु यथेच्छा ते | ... | ५ |
| एतावन्मात्रमप्यशेष० | ... | ४ | १३ | १४३ | एवमुक्ते तु कृष्णेन | ... | ५ |
| एतान्यन्यानि चोदार० | ... | २ | ५ | १२ | एवमन्यैस्तथा क्लेशैः | ... | ६ |
| एतान्यन्यानि चोग्राणि | ... | ६ | ५ | ४३ | एवमादीनि दुःखानि | ... | ६ |
| एतान्यशेषरूपाणि | ... | ६ | ७ | ६८ | एवमेष महाञ्छब्दः | ... | ६ |
| एते चान्ये च ये देवाः | ... | १ | १३ | २२ | एवमेतद्भवन्तोऽत्र | ... | ६ |
| एते भिन्नदृशां दैत्याः | ... | १ | १७ | ८३ | एवमत्यन्तनिःश्रीके | ... | १ |
| एते दनोः सुताः ख्याताः | ... | १ | २१ | ६ | एवमुक्त्वा सुरान्सर्वान् | ... | १ |
| एते वै दानवाः श्रेष्ठा | ... | १ | २१ | १३ | एवमेकोनपञ्चाशत् | ... | १ |
| एते युगसहस्रान्ते | ... | १ | १५ | १३७ | एवमेकाग्रचित्तेन | ... | १ |
| एते कश्यपदायादाः | ... | १ | २१ | २६ | एवमुक्त्वा ततस्तेन | ... | १ |
| एते सर्वे प्रवृत्तस्य | ... | १ | २२ | १६ | एवमुक्त्वा तु ते सर्वे | ... | १ |
| एते द्वीपाः समुद्रैस्तु | ... | २ | २ | ६ | एवमभ्यर्थितस्तैस्तु | ... | १ |
| एते शैलास्तथा नद्यः | ... | २ | ४ | १२ | एवमव्याकृतात्पूर्वम् | ... | २ |
| एते चान्ये च नरकाः | ... | २ | ६ | ३० | एवमेव विभागोऽयम् | ... | १ |