विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ततो विज्ञातसद्भावः | ५ | १८ | ४७ | ततः परमर्षिणा | ४ | २ | ९९ |
| ततो हाहाकृतं सर्वम् | ५ | २० | ९१ | ततः कोपपरीतात्मा | ५ | ३६ | १५ |
| ततो रामश्च कृष्णश्च | ५ | २२ | ५ | ततः प्रबुद्धो रात्र्यन्ते | ६ | ४ | १० |
| ततो युद्धे पराजित्य | ५ | २२ | ८ | ततः प्रणम्य वरदम् | ५ | ३३ | ४ |
| ततो निजक्रियासूति | ५ | २३ | ४५ | ततः कृष्णेन बाणस्य | ५ | ३३ | ३१ |
| ततो गोपांश्च गोपीश्च | ५ | २४ | ९ | ततः काशीबलं भूरि | ५ | ३४ | ४० |
| ततः पटे सुरान्दैत्यान् | ५ | ३२ | २२ | ततः क्रुद्धा महावीर्याः | ५ | ३५ | ५ |
| ततः प्रबुद्धाः पुरुषम् | ५ | ३२ | १६ | ततः पुनर्व्युत्पन्न | ४ | १ | ८० |
| ततः काले शुभे प्राप्ते | ५ | ३१ | १६ | ततः किञ्चिदवनतशिराः | ४ | १ | ७३ |
| ततः परिघनिस्त्रिंश० | ५ | ३० | ५४ | ततः काकत्वमापन्नम् | ३ | १८ | ८१ |
| ततः कृष्णस्य पत्नी च | ५ | ३० | २६ | ततः क्रोधव्यवायादीन् | ३ | १५ | १० |
| ततः प्रीता जगन्माता | ५ | ३० | ५ | ततः स्ववासिनीदुःखि० | ३ | ११ | ७१ |
| ततः कोपपरीतात्मा | ५ | २८ | १८ | ततः कल्यं समुत्थाय | ३ | ११ | ८ |
| ततः कदम्बात्सहसा | ५ | २५ | ६ | ततः क्रुद्धो गुरुः प्राह | ३ | ५ | ९ |
| ततः कलियुगं मत्वा | ५ | २४ | ५ | ततः प्रबुद्धो भगवान् | ३ | २ | ५३ |
| ततः कोपपरीतात्मा | ५ | २३ | २ | ततः पितृत्वमापन्ने | ३ | १३ | ३० |
| ततः कुवलयापीडः | ५ | २० | ३२ | ततः पुनः स वै देवः | ३ | १ | ३७ |
| ततः समस्तमज्जेषु | ५ | २० | २५ | ततः खड्गं समादाय | २ | १३ | ५० |
| ततः पूरयता तेन | ५ | २० | १६ | ततः सा सहसा त्रासात् | २ | १३ | १५ |
| ततः प्रहृष्टवदनः | ५ | १९ | २२ | ततः शङ्खगदाचक्र० | ६ | ७ | ८८ |
| ततः प्रभाते विमले | ५ | १८ | १२ | ततः सम्भवत्तत्र | २ | १३ | १४ |
| ततः प्रवृत्ते रासः | ५ | १३ | ५१ | ततः प्रभवति ब्रह्मन् | २ | ८ | १०८ |
| ततः काञ्चित्प्रियालापैः | ५ | १३ | ४७ | ततः सप्तर्षयो यस्याः | २ | ८ | ११० |
| ततः फलान्यनेकानि | ५ | ८ | १० | ततः प्रयाति भगवान् | २ | ८ | ५८ |
| ततः क्षणेन पृथिवी | ५ | ११ | ७ | ततः सूर्यस्य तैर्युद्धम् | २ | ८ | ५१ |
| ततः कुरु जगत्स्वामिन् | ५ | ७ | ५७ | ततः स ससृजे मायाम् | १ | १९ | १७ |
| ततः प्रवेष्टितस्सर्पैः | ५ | ७ | १७ | ततः सूदा भयत्रस्ता | १ | १८ | ७ |
| ततः क्षणेन प्रययुः | ५ | ६ | २६ | ततः स दिग्गजैर्बालः | १ | १७ | ४२ |
| ततः कटकटाशब्द० | ५ | ६ | १८ | ततः सर्वासु मायासु | १ | १२ | ३१ |
| ततः पुनरतीवासन् | ५ | ६ | ६ | ततः सम्मन्त्र्य ते सर्वे | १ | १३ | ३३ |
| ततः क्षयमशेषास्ते | ५ | १ | ६३ | ततः स नृपतिस्तोषम् | १ | १३ | ५७ |
| ततः शुचिरथः | ४ | २१ | ११ | ततः प्रणम्य वसुधा | १ | १३ | ७७ |
| ततः परमसौ स्त्रीभोगम् | ४ | ४ | ६८ | ततः प्रसन्नो भगवान् | १ | १४ | ४५ |
| ततः केवलोऽभूत् | ४ | १ | ४२ | ततः प्रहस्य सुदती | १ | १५ | २६ |
| ततः पुष्पमित्राः पटुमित्राः | ४ | २४ | ५८ | ततः सोमस्य वचनात् | १ | १५ | ७३ |
| ततः कणवानेषा भूः | ४ | २४ | ३८ | ततः प्रभृति वै भ्राता | १ | १५ | १०० |
| ततः प्रभृति शूद्रा भूपालाः | ४ | २४ | २१ | ततः प्रभृति मैत्रेय | १ | १५ | ७९ |
| ततः कुमारः कृपः | ४ | १९ | ६८ | ततः स कथयामास | १ | ११ | ३७ |
| ततः प्रभृत्यक्रूरः प्रकटैनैव | ४ | १३ | १६१ | ततः प्रसन्नाः सूर्यः | १ | ९ | ११३ |
| ततः स्वोदरवस्त्रनिगोपित० | ४ | १३ | १४५ | ततः पपुः सुरगणाः | १ | ९ | ११० |
| ततः प्रस्फुरदुच्छ्वसिताम् | ४ | ६ | ३३ | ततः स्मयित्वा स बलः | ५ | ३६ | १६ |