विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नखादिना चोपपन्नम् | ३ | १६ | १५ | नन्दोपनन्दकृतकाद्याः | ४ | १५ | २३ |
| नखांकुरविनिर्भिन्न० | ५ | ५ | १६ | नन्दोऽपि गृह्यतां पापः | ५ | २० | ८३ |
| नगरस्य बहिः सोऽथ | २ | १६ | २ | नन्दं च दीनमत्वर्थम् | ५ | ७ | ३४ |
| नग्नस्वरूपमिच्छामि | ३ | १७ | ४ | न पपाठ गुरूप्रोक्तम् | २ | १३ | ३९ |
| नग्नां परस्त्रियं चैव | ३ | १२ | १२ | न प्रार्थितं त्वया कस्मात् | ६ | ७ | १ |
| न घर्घरस्वरां क्षामाम् | ३ | १० | १९ | न प्रीतिर्वेदवादेषु | ६ | १ | ४९ |
| न च कश्चित्त्रयोविंशति० | ४ | २४ | ९७ | न बबन्धाम्बरे स्थैर्यम् | ५ | ६ | ४२ |
| न चलति निजवर्णधर्मतो यः | ३ | ७ | २० | न ब्रह्मा नेन्द्ररुद्राश्वि० | ५ | १७ | ८ |
| न चान्यैर्नीयते कश्चित् | १ | १७ | ८९ | नभशिररस्तेऽम्बुवहाश्च केशाः | ५ | ९ | २६ |
| न चासौ राजा ममार | ४ | २ | ५८ | नभसोऽब्धं भुवः पंकम् | ५ | १० | १४ |
| न चापि सर्गसंहार० | ५ | ३० | ७८ | न भिन्नं विविधैः शस्त्रैः | १ | १५ | १४६ |
| न चिन्त्यं भवतः किञ्चित् | १ | ११ | ३५ | नमस्ते परमात्मत्मन् | १ | ४ | १४ |
| न चिन्तयति को राज्यम् | १ | १९ | ४३ | नमस्ते सर्वलोकानाम् | १ | ९ | ११७ |
| न जातु कामः कामानाम् | ४ | १० | २३ | न मन्त्रादिकृतं तात | १ | १९ | ४ |
| न तद्बलं यादवानाम् | ५ | २२ | १३ | नमस्ते पुण्डरीकाक्ष | ५ | ३० | ६ |
| न तद्योगयुजा शक्यम् | ६ | ७ | ५५ | नमस्ते पुण्डरीकाक्ष | १ | १९ | ६४ |
| न ताडयति नो हन्ति | ३ | ८ | १५ | नमस्ते पुण्डरीकाक्ष | १ | ४ | १२ |
| नताः स्म सर्ववचसाम् | १ | १४ | २३ | नमस्तस्मै नमस्तस्मै | १ | १९ | ७९ |
| न तु सा वाग्यता देवी | ३ | १५ | ५९ | नमस्कृत्याप्रमेयाय | १ | २२ | ६७ |
| न तु स तस्मिन्ननादिनिधने | ४ | १५ | ८ | नमस्सवित्रे द्वाराय | ३ | ५ | १६ |
| न तेषु वर्षते देवः | २ | २ | ५५ | नमस्ते चक्रहस्ताय | ५ | ३० | २२ |
| न ते वर्णयितुं शक्ताः | १ | ९ | १३३ | नमामि सर्वं सर्वेशम् | १ | ९ | ४० |
| न त्यक्ष्यति हरेः पक्षम् | १ | १७ | ५२ | न मायाभिर्न चैवोच्चात् | १ | १९ | ६० |
| न त्वां करोम्यहं भस्म | १ | १५ | ४१ | न मे जाम्बवती तादृक् | ५ | ३० | ३५ |
| न त्वं वृको महाभाग | ३ | १८ | ७८ | न मेऽस्ति वित्तं न धनं च नान्यत् | ३ | १४ | ३० |
| नदस्वरूपी भगवान् | १ | ८ | ३२ | नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः | ५ | १ | ५५ |
| नदीनदतटाकेषु | ३ | ११ | २५ | नमो ब्रह्मण्यदेवाय | १ | १९ | ६५ |
| नदीमैत्रेय ते तत्र | २ | ४ | ५४ | नमो विवस्वते ब्रह्म | ३ | ११ | ४० |
| न दुष्टां दुष्टवाक्यां वा | ३ | १० | १८ | नमो हिरण्यगर्भाय | १ | २ | २ |
| न भ्रश्यन्ति यतस्तेभ्यः | २ | ९ | १० | नमो नमोऽविशेषस्त्वम् | १ | ९ | ६१ |
| नद्यो नदाः समुद्राश्च | १ | १२ | ११ | नमोऽग्निशोमभूताय | ३ | ५ | १७ |
| नद्यः समुद्रा गिरयः | ५ | ३८ | ५६ | नमोऽस्तु विष्णवे तस्मै | १ | १९ | ८२ |
| न द्वारबन्धावरणाः | ५ | १० | ३३ | नर्मदा सुरसाद्याश्च | २ | ३ | ११ |
| न नूनं कार्तवीर्यस्य | ४ | १९ | १६ | नमः सवित्रे सूर्याय | ३ | ५ | २४ |
| नन्दगोपादयो गोपाः | ५ | २० | २८ | न यज्ञाः समवर्त्तन्त | १ | ९ | २७ |
| नन्दगोपमुखा गोपाः | ५ | १८ | २३ | न यष्टव्यं न दातव्यम् | १ | १३ | १४ |
| नन्दगोपस्सदुर्बुद्धिः | ५ | ११ | ३ | न यक्षैर्न च दैत्येन्द्रैः | १ | १७ | ८७ |
| नन्दगोपस्य वचनम् | ५ | १० | २५ | न यस्य जन्मने धाता | ५ | ७ | ५२ |
| नन्दगोपश्च गोपाश्च | ५ | ७ | २२ | न यत्र नाथ विद्यन्ते | ५ | १८ | ५३ |
| नन्दगोपोऽपि निश्चेष्टः | ५ | ७ | २४ | न याच्ञा क्षत्रबन्धूनाम् | ६ | ७ | ६ |
| नन्दिना सङ्गृहीताश्वम् | ५ | ३३ | २८ | नरकेषु समस्तेषु | ३ | ११ | ३६ |