विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नरस्य संकृतिस्संकृतेः | ४ | १९ | २२ | नहुषक्षत्रवृद्धरम्भरजि० | ४ | ८ | ३ |
| नरकस्यासुरेन्द्रस्य | ५ | ३६ | २ | न ह्यनुल्लङ्घ्य वरपादपम् | ४ | १३ | ७६ |
| नरके यानि दुःखानि | ६ | ५ | ४९ | न ह्याप्तवादा नभसः | ३ | १८ | ३१ |
| नरकिन्नररक्षांसि | १ | ५ | ५९ | न ह्यादिमध्यान्तमजस्य यस्य | ४ | १ | ८३ |
| नरकेणास्य तत्राभूत् | ५ | २९ | २० | न ह्येतादृगन्यत् | ४ | ५ | १७ |
| नरकं कर्मणां लोपात् | ६ | ५ | २६ | नाकारणात्कारणाद्वा | ५ | १ | ५१ |
| नराधिपोऽत्र कतमः | २ | १६ | ६ | नागरीयोषितां मध्ये | ५ | २० | २९ |
| नरेन्द्र स्मर्यतामात्मा | ३ | १८ | ८० | नागद्वीपास्तथा सौम्यः | २ | ३ | ७ |
| नरेन्द्र कस्मात् | ४ | २ | ८१ | नागवीथ्युत्तरं यच्च | २ | ८ | ९० |
| न रेजेऽन्तरितश्चन्द्रः | ५ | ६ | ३९ | नागपत्न्यश्च शतशः | ५ | ७ | १६ |
| नरः ख्यातिः केतुरूपः | ३ | १ | १९ | नाग्निर्दहति नैवायम् | १ | १९ | ५९ |
| नर्मदायै नमः | ४ | ३ | १३ | नाडिका तु प्रमाणेन | ६ | ३ | ७ |
| न लयं तत्र तेनैव | ४ | १५ | २ | नाडिकाभ्यामथ द्वाभ्याम् | ६ | ३ | ९ |
| न वयं कृषिकर्त्तारः | ५ | १० | २६ | नातिक्रान्तुमलं ब्रह्मन् | ५ | ३८ | १० |
| नवयोजनसाहस्रः | २ | ३ | २ | नातिदूरेऽवस्थितं च | ४ | ४ | २० |
| नवस्त्र्यक्षैष्षमावास्या | ३ | १४ | १० | नानिरूक्तच्छविं पाण्डु० | ३ | १० | २१ |
| नववर्षं तु मैत्रेय | २ | ३ | २७ | नातिदीर्घं नातिह्रस्वम् | ३ | १० | ११ |
| नवसाहस्रमेकैकम् | २ | २ | १५ | नातिज्ञानवहा यस्मिन् | ३ | १७ | १९ |
| नव ब्रह्माण इत्येते | १ | ७ | ६ | नातिक्लेशेन महता | ६ | २ | २१ |
| नवमो दक्षसावर्णिः | ३ | २ | २० | नात्र भवता प्रत्याख्यानम् | ४ | १० | ११ |
| न वयमन्यथा वदिष्यामः | ४ | ९ | ८ | नात्र स्थेयं त्वया सर्प | ५ | ७ | ७७ |
| न वामनां नातिदीर्घाम् | ३ | १० | २२ | नाथ योनिसहस्रेषु | १ | २० | १८ |
| न विद्मः किं स शक्रत्वम् | १ | १२ | ३६ | नादक्षिणां नान्यकामाम् | ३ | ११ | ११६ |
| नवोद्गतालपदन्तांशु० | ५ | ६ | १९ | नाद्यूनां तु श्रियं गच्छेत् | ३ | ११ | ११५ |
| न शब्दगोचरं यस्य | १ | १७ | २२ | नानावीर्याः पृथग्भूताः | १ | २ | ५२ |
| न शान्ता नापि घोरास्ते | १ | २ | ४६ | नानार्यानाश्रयेत्कांश्चित् | ३ | १२ | १६ |
| न श्मश्रु भक्षयेल्लोष्ठम् | ३ | १२ | ११ | नानाप्रकारवचनम् | ३ | १८ | २१ |
| नष्टे चाग्नौ च सततम् | ६ | ३ | ३८ | नानौषधीः समानीय | १ | ९ | ८३ |
| न सहति परसम्पदं विनिन्दाम् | ३ | ७ | २९ | नान्तोऽस्ति यस्य न च यास्य समुद्भवोऽस्ति | ६ | ८ | ६० |
| न सस्यानि न गोरक्ष्यम् | १ | १३ | ८४ | नान्दीमुखः पितृगणः | ३ | १३ | ४ |
| न समर्थाः सुरास्तोतुम् | ५ | ७ | ४९ | नान्यपिष्टं हि कंसस्य | ५ | २० | ५ |
| न सन्ति यत्र सर्वेशे | ६ | ४ | ३७ | नान्यस्त्रियं तथा वैरम् | ३ | १२ | ५ |
| न सेहे देवकीं द्रष्टुम् | ५ | २ | ५ | नान्ययोनावयोनौ वा | ३ | ११ | १२१ |
| न स्थूलं न च सूक्ष्मं यत् | १ | ९ | ५२ | नान्यस्याद्वैतसंस्कार० | २ | १६ | १६ |
| न स्नायान्न स्वपेन्नग्नः | ३ | १२ | १९ | नान्यदत्तमभीप्सामि | १ | ११ | २९ |
| न स्वेदो न च दौर्गन्ध्यम् | २ | २ | २२ | नाप्सु नैवाम्भसस्तीरे | ३ | ११ | १३ |
| न हन्तव्या महाभाग | ५ | १ | १० | नाभागस्यात्मजः | ४ | २ | ५ |
| न हि कश्चिद्भगवता | ४ | १३ | ८५ | नाम रूपं च भूतानाम् | १ | ५ | ६३ |
| न हि पूर्वविसर्गे वै | १ | १३ | ८३ | नाम देहीति तं सोऽथ | १ | ८ | ४ |
| न हि कौतूहलं तत्र | १ | १६ | १२ | नारदे तु गते कृष्णः | ५ | १६ | २८ |
| न हि पालनसामर्थ्यम् | १ | २२ | २१ |