विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नारदेनैवमुक्ता सा | ५ | २७ | १२ | निमेरपि तच्छरीरमतिमनोहर | ४ | ५ | १३ |
| नारभेत कलिं प्राज्ञः | ३ | १२ | २३ | नियुद्धे तद्विनाशेन | ५ | २० | २० |
| नारायणात्मजस्सुशर्मा | ४ | २४ | ४१ | नियुद्धप्राश्निकानां तु | ५ | २० | ६२ |
| नारायणभुजाघात० | ५ | ३३ | १७ | निरवद्यः परः प्राप्तेः | ५ | १ | ४९ |
| नारायणमणीयांसम् | १ | ९ | ४१ | निरतिशयपुण्यसमुद्भूतम् | ४ | १५ | ६ |
| नारायणः परोऽचिन्त्यः | १ | ४ | ४ | निरस्तातिशयाह्लाद० | ६ | ५ | ५९ |
| नार्थहीनं न चाशस्तम् | ३ | १० | १० | निरीक्ष्य तं तदा देवी | १ | ४ | ११ |
| नार्हसि स्त्रीधर्मसुखाभिज्ञः | ४ | ४ | ६३ | निरुच्छ्वासः सचैतन्यः | ६ | ५ | १३ |
| नावगाहेज्जलोद्घस्य | ३ | १२ | ८ | निरुद्धकण्ठो दोर्पाथैः | ६ | ५ | ४१ |
| नाविशालां न वै भग्नाम् | ३ | ११ | ११२ | निर्गुणेनापि चापेन | ५ | ६ | ४० |
| नाशकन्मरुतो वातुम् | १ | १५ | २ | निर्गुणस्याप्रमेयस्य | १ | ३ | १ |
| नाशायास्य निमित्तानि | ५ | ३७ | ३३ | निर्मोहस्तत्त्वदर्शी च | ३ | २ | ४० |
| नाशेषं पुरुषोऽश्नीयात् | ३ | ११ | ८६ | निर्याणं बलभद्रस्य | ५ | ३७ | ५८ |
| नासमञ्जसशीलैस्तु | ३ | १२ | २१ | निर्यौगपाशस्कन्धौ तौ | ५ | ९ | ४ |
| नासस्या नातृणा भूमिः | ५ | १० | २२ | निर्विण्णचित्तस्स ततः | ६ | १८ | ७२ |
| नासन्दिसंस्थिते पात्रे | ३ | ११ | ८३ | निर्जगाम गृहान्मातुः | १ | ११ | ३० |
| नास्माभिः शक्यते हन्तुम् | १ | १९ | १५ | निर्जित्य रुक्मिणं सम्यक् | ५ | २६ | ११ |
| नाहमर्थमभीप्सामि | १ | ११ | ४१ | निर्जितश्च भगवता | ४ | १३ | ५२ |
| नाहो न रात्रिर्न नभो न भूमिः | १ | २ | २३ | निर्मलाः सर्वकालन्तु | २ | १ | १० |
| नाहं मन्ये लोकजयात् | ६ | ६ | ३० | निर्मार्जमाना गात्राणि | १ | १५ | ४७ |
| नाहं कृपालुहृदयः | १ | ९ | २० | निर्वाणमय एवायम् | ६ | ७ | २२ |
| नाहं क्षमिष्ये बहुना | १ | ९ | २४ | निर्वापारमनाख्येयम् | १ | २२ | ५० |
| नाहं पीवान चैवोढा | २ | १३ | ६२ | निर्द्वन्द्वा निरभिमानाः | २ | ८ | ८४ |
| नाहं वहामि शिबिकाम् | २ | १४ | ४ | निर्धूतदोषपंकानाम् | २ | ८ | ९९ |
| नाहं प्रसूता पुत्रेण | ४ | १२ | २९ | निर्यौवना गतश्रीका | ५ | ३८ | ४८ |
| नाहं बलदेववासुदेवाभ्याम् | ४ | १३ | ८३ | निवारयामास हरिः | ५ | ३७ | ४८ |
| नाहं देवो न गन्धर्वः | ५ | १३ | १२ | निवापेन पितॄनर्चन् | ३ | ९ | ९ |
| निकुम्भस्यामिताश्वः | ४ | २ | ४५ | निवृत्तास्तदा गोप्यः | ५ | १३ | ४२ |
| निघ्नस्य प्रसेनस्त्राजितौ | ४ | १३ | १० | निवेष्टुकामोऽस्मि नरेन्द्र कन्याम् | ४ | २ | ७७ |
| निजेन तस्य मानेन | १ | ३ | ५ | निशम्य तस्येति वचः | २ | १४ | १ |
| नित्यनैमित्तिकाः काम्याः | ३ | १० | २ | निशम्य तद्वचः सत्यम् | १ | १५ | ३५ |
| नित्यानित्यप्रपञ्चात्मन् | १ | २० | १२ | निशम्यैतदशेषेण | १ | १२ | १ |
| नित्यानां कर्मणां विप्र | ३ | १८ | ३९ | निशासु च जगत्स्रष्टा | ५ | ३१ | २० |
| नित्यैवैषा जगन्माता | १ | ८ | १७ | निशेयं नीयतां वीर | ५ | १८ | १० |
| निद्रे गच्छ ममादेशात् | ५ | १ | ७२ | निश्रीकता न मे चित्रम् | ५ | ३८ | ५३ |
| निभृतोऽभवदत्यर्थम् | ५ | १० | १० | निषधस्याप्यनलः | ४ | ४ | १०६ |
| निमग्नश्च समुत्थाय | ६ | २ | ८ | निषधः पारियात्रश्च | २ | २ | ४३ |
| निमग्नश्च पुनस्तोये | ५ | १८ | ४६ | निष्कास्यतामयं पापः | १ | १७ | २७ |
| निमित्तमात्रमेवाऽसौ | १ | ४ | ५१ | निष्क्रम्याल्पपरीवारा० | ५ | २२ | ४ |
| निमित्तमात्रं मुक्त्वैवम् | १ | ४ | ५२ | निष्क्रम्य स मुखातस्य | ५ | ३७ | ५५ |
| निमेषो मानुषो योऽसौ | ६ | ३ | ६ | निष्पादितो मया यागः | ६ | ६ | ४३ |