विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| साधितं कृष्ण देवानाम् | ५ | १२ | १० | सीतामयौनिजां जनक० | ४ | ४ | ९३ |
| साधु साधु जगन्नाथ | ५ | १६ | १९ | सीता चालकनन्दा च | २ | ८ | ११३ |
| साधु साध्वस्य रूपम् | ४ | ६ | ७१ | सीमन्तोन्नयने चैव | ३ | १३ | ६ |
| साधु भो किमनन्तेन | १ | १८ | २० | सीरध्वजस्य भ्राता | ४ | ५ | २९ |
| साधु मैत्रेय धर्मज्ञ | १ | १ | १२ | सीरध्वजस्यापत्यम् | ४ | ५ | ३० |
| साध्या विश्वेऽथ मरुतः | ५ | ३० | ६३ | सुकुमारसंज्ञाय बालकाय | ४ | १३ | ३४ |
| साध्विदं ममापत्यरहितस्य | ४ | १२ | १९ | सुकुमारस्तनुर्गर्भे | ६ | ५ | १० |
| साध्वीविक्रयकृद्धन्ध० | २ | ६ | ११ | सुकुमारी कुमारी च | २ | ४ | ६५ |
| सानुरागश्च तस्यां बुधः | ४ | १ | १२ | सुक्षेत्रश्चोत्तमौजाश्च | ३ | २ | २८ |
| सान्तानिकादयो वा ते | ५ | ३८ | ३८ | सुखबुद्ध्या मया सर्वम् | ५ | २३ | ४१ |
| सापह्ननं मम मनः | ५ | २० | ९९ | सुखदुःखोपभोगौ तु | २ | १३ | ८१ |
| सापि द्वितीये सम्प्राप्ते | ३ | १८ | ७३ | सुखोदयस्थाननन्दः | २ | ४ | ४ |
| सापि तावता कालेन | ४ | १३ | १२३ | सुखं सिद्धियशः कीर्तिः | १ | ७ | ३१ |
| साफल्यमक्षणोर्युगमेतदत्र | ५ | १७ | २७ | सुगन्धमेतद्राजार्हम् | ५ | २० | ६ |
| सामवेदतरोश्शाखा | ३ | ६ | १ | सुतामजैस्ततनयैश्च भूयः | ४ | २ | १२२ |
| साम चोपप्रदानं च | १ | १९ | ३५ | सुताराख्या कन्या च | ४ | १४ | ९ |
| साम चोपप्रदानं च | ५ | २२ | १७ | सुतृप्तैस्तैरनुज्ञातः | ३ | १५ | ३९ |
| सामपूर्वं च दैतेयाः | १ | ९ | ७९ | सुत्रामाणः सुकर्माणः | ३ | २ | ३८ |
| सामस्वरूपी भगवान् | १ | ८ | २२ | सुदासात्सौदासः | ४ | ४ | ४० |
| सामर्थ्ये सति तत्त्याज्यम् | ३ | ८ | ४० | सुद्युम्नस्तु स्त्रीपूर्वकत्वात् | ४ | १ | १५ |
| सामानि जगतीच्छन्दः | १ | ५ | ५५ | सुधनुर्ज्जन्तुपरीक्षित् | ४ | १९ | ७८ |
| सामान्यस्सर्वलोकस्य | ५ | ३० | ४६ | सुधनुषः पुत्रस्सुहोत्रः | ४ | १९ | ७९ |
| साम्प्रतं च जगत्स्वामी | ५ | १७ | ११ | सुधामानस्तथा सत्या | ३ | १ | १४ |
| साम्प्रतं महीतलेऽष्टाविंशति० | ४ | १ | ७६ | सुधामा शङ्कपाच्चैव | २ | ८ | ८३ |
| सा यदा धारणा तद्वत् | ६ | ७ | ८९ | सुनिवातेषु देशेषु | ५ | ११ | १८ |
| सारं समस्तगोष्ठस्य | ५ | १८ | १६ | सुनीथा नाम या कन्या | १ | १३ | ११ |
| सार्धकोटिस्तथा सप्त | २ | ८ | ३ | सुनीतिरपि ते माता | १ | १२ | ९४ |
| सार्टिमाष्टिशिशुसत्य० | ४ | १५ | २१ | सुनीतिर्नाम तन्माता | १ | १२ | १४ |
| सालम्बनो महायोगः | १ | २२ | ६२ | सुनीतिर्नाम या राज्ञः | १ | ११ | ३ |
| सावर्णिस्तु मनुर्योऽसौ | ३ | २ | १५ | सुपारात्पृथुः | ४ | १९ | ४२ |
| साशीतिमण्डलशतम् | २ | १० | १ | सुप्तांश्च तानृपीन्नैव | ४ | २ | ५२ |
| साश्वं च तं निहत्य | ४ | १३ | ३२ | सुप्तेषु तेषु अतीव | ४ | २ | ५१ |
| सितनीलादिभेदेन | २ | १६ | २२ | सुप्रभाताद्य रजनी | ५ | १८ | २४ |
| सितदीर्घादिनिशेष० | ५ | ३० | ८ | सुप्रसन्नादित्यचन्द्रादि० | ४ | १५ | ३२ |
| सिन्धवो निजशब्देन | ५ | ३ | ५ | सुबालस्तूनीतो भविता | ४ | २३ | ९ |
| सिन्धुतटदावीकोर्वी | ४ | २४ | ६९ | सुबाहुप्रमुखांश्च क्षयम् | ४ | ४ | ९० |
| सिसृक्षुरन्यदेहस्थः | १ | ५ | ३३ | सुभद्रायां चारुभक्त्वेऽपि | ४ | २० | ५१ |
| सिंहनादं ततश्चक्रे | ५ | १४ | ८ | सुभ्रु त्वामहम् | ४ | ६ | ४० |
| सिंहासनगतः शक्रः | १ | ९ | ११६ | सुमतिम्प्रतिरथं ध्रुवम् | ४ | १९ | ४ |
| सिंहिका चाभवत्कन्या | १ | १५ | १४१ | सुमतिः पुत्रसहस्राणि | ४ | ४ | ४ |
| सिंहः प्रसेनमवधीत् | ४ | १३ | ४२ | सुमतिश्चाग्निवर्चाश्च | ३ | ६ | १७ |