विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सुमहांच्छायमनावृष्टिः | ४ | १३ | १३३ | सृज्जयात् पुरूज्जयः | ४ | १८ | ४ |
| सुमन्तुस्तस्य पुत्रोऽभूत् | ३ | ६ | २ | सृज्जयात्सहदेवः | ४ | १ | ५४ |
| सुमतिर्भरतस्याभूत् | २ | १ | ३३ | सृष्टाः कालेन कालेन | ५ | ३८ | ५७ |
| सुमतस्तेजसस्तस्मात् | २ | १ | ३६ | सृष्टिस्थित्यन्तकालेषु | १ | २२ | ४१ |
| सुमेधा विरजाश्चैव | ३ | १ | २८ | सृष्टिस्थितिविनाशानाम् | १ | ७ | ४७ |
| सुयोधनस्य तनयाम् | ५ | ३५ | ४ | सृष्टिस्थित्यन्तकरणीम् | १ | २ | ६६ |
| सुरम्याणि तथा तासु | २ | २ | ४७ | सृष्टिं चिन्तयतस्तस्य | १ | ५ | ४ |
| सुरभिर्विनता चैव | १ | १५ | १२५ | सृष्टं च पात्यनुयुगम् | १ | २ | ६२ |
| सुरसायां सहस्रं तु | १ | २१ | १९ | सेतुपुत्र आरब्धनामा | ४ | १७ | ३ |
| सुरासुरगन्धर्वयक्ष० | ४ | १३ | ५३ | सेन्द्रै रुद्रानिग्वसुभिः | ५ | ७ | ३७ |
| सुरापो ब्रह्महा हर्ता | २ | ६ | ९ | सेयं धात्री विधात्री च | २ | ४ | ९७ |
| सुरासमस्तास्सुरनाथ कार्यम् | ५ | १ | ५९ | सैन्धवान्मुञ्जिकेशश्च | ३ | ६ | १३ |
| सुराश्च सकलास्स्वांशैः | ५ | १ | ६२ | सैव च मित्रावरुणयोः | ४ | १ | १० |
| सुरामांसोपहारैश्च | ५ | १ | ८६ | सैष विष्णुः स्थितः स्थित्याम् | २ | ११ | ८ |
| सुरुचिर्दयिता राज्ञः | १ | ११ | २७ | सैष भ्रमन् भ्रामयति | २ | ९ | २ |
| सुरुचिः सत्यमाहेदम् | १ | ११ | १६ | सैषा धात्री विधात्री च | १ | १३ | ९२ |
| सुवर्चला तथैवोषाः | १ | ८ | ८ | सोऽतिकोपादुपालभ्य | ५ | १५ | ५ |
| सुवर्णमणिरत्नादौ | ६ | १ | १७ | सोऽधिरुह्य महानागम् | ५ | १२ | २ |
| सुवर्णाञ्जनचूर्णाभ्याम् | ५ | ९ | ५ | सोऽनपत्योऽभवत् | ४ | १६ | ४ |
| सुवृद्धेः केवलः | ४ | १ | ३८ | सोऽपि च तामतिशायितसकल० | ४ | ६ | ३७ |
| सुशर्माणं तु काण्वम् | ४ | २४ | ४३ | सोऽपि प्रविष्टो यवनः | ५ | २३ | १९ |
| सुशीलो भव धर्मात्मा | १ | ११ | २४ | सोऽपि तत्काल एवान्यैः | ४ | ५ | ६ |
| सुरोदकः परिवृतः | २ | ४ | ३४ | सोऽपि पौरवं यौवनम् | ४ | १० | १८ |
| सुहोत्राद्धस्ती य इदम् | ४ | १९ | २८ | सोऽपि कैशोरकवयः | ५ | १३ | ६० |
| सूक्ष्मातिसूक्ष्मातिबृहत्प्रमाण | ५ | १ | ५६ | सोऽप्यतीन्द्रियमालोक्य | ५ | २१ | २५ |
| सूतेनोक्तान् गुणानित्थम् | १ | १३ | ६४ | सोऽप्येनं ध्वजवज्राब्ज० | ५ | १८ | २ |
| सूदयाम्येव दैत्येन्द्र | १ | १९ | १६ | सोऽप्येनं मुष्टिना मूर्ध्नि | ५ | २० | ७८ |
| सूदयंतस्तपानुग्रः | ५ | १४ | ६ | सोमदतं शलं चैव | ५ | ३५ | २८ |
| सूर्यस्य वंशा भगवान् | ४ | ६ | १ | सोमदत्तः कृशाश्वाज्जज्ञे | ४ | १ | ५६ |
| सूर्यस्य पत्नी संज्ञाभूत् | ३ | २ | २ | सोमदत्तस्यापि भूरि० | ४ | २० | ३२ |
| सूर्यरश्मिः सुषुम्ना यः | २ | ११ | २२ | सोमकाज्जन्तुः | ४ | १९ | ७२ |
| सूर्याचन्द्रमसौ ताराः | २ | ९ | ३ | सोमसंस्था हविस्संस्थाः | ३ | ११ | २४ |
| सूर्यात्सोमात्तथा भौमात् | १ | १२ | ९१ | सोमस्य भगवान्वर्चाः | १ | १५ | ११२ |
| सूर्यादीनां द्विजश्रेष्ठ | १ | ८ | ९ | सोमार्कान्ग्र्म्बुवायूनाम | ३ | १२ | २७ |
| सूर्यादीनां च संस्थानम् | १ | १ | ७ | सोमाधारः पितृगणः | ३ | १५ | ५५ |
| सूर्याशुजनितं तापम् | ५ | १० | १३ | सोमं पञ्चदशे भागे | २ | १२ | ११ |
| सूर्येणाभ्युदितो यश्च | ३ | ११ | १०२ | सोऽयमेको यथा वेदः | ३ | ४ | १५ |
| सूर्यो द्वादशभिः शैघ्र्यान् | २ | ८ | ३४ | सोऽयं येन हता घोराः | ५ | २० | ४५ |
| सृजत्येष जगत्सृष्टौ | १ | २२ | २२ | सोऽयं सोऽयमितीत्युक्ते | ५ | ३२ | २६ |
| सृज्यते भवता सर्वम् | ५ | ७ | ७२ | सोऽयं त्वयैव दत्तो मे | ५ | २९ | २४ |
| सृज्यस्वरूपगर्भासि | ५ | २ | ८ | सोऽयं सप्तगणः सूर्य० | २ | १० | २३ |