भारतकोश
विष्णु पुराण

विष्णु पुराण

Vishnu Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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॥ श्रीहरिः ॥

विषय-सूची

अध्यायविषयपृष्ठ-संख्याअध्यायविषयपृष्ठ-संख्या
प्रथम अंश२०-प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान्‌का आविर्भाव..... ९९
१-ग्रन्थका उपोद्घात..... ७२१-कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन..... १०२
२-चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्ति-क्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा..... ९२२-विष्णुभगवान्‌की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन..... १०५
३-ब्रह्मादिकी आयु और कालका स्वरूप..... १४द्वितीय अंश
४-ब्रह्माजीकी उत्पत्ति, वराहभगवान्‌द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना..... १६१-प्रियव्रतके वंशका वर्णन..... १११
५-अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन..... २१२-भूगोलका विवरण..... ११४
६-चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन..... २६३-भारतादि नौ खण्डोंका विभाग..... १
७-मरीचि आदि प्रजापतिगण, तामसिक सर्ग, स्वायम्भुवमनु और शतरूपा तथा उनकी सन्तानका वर्णन..... २९४-प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन..... १
८-रौद्र-सृष्टि और भगवान् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन..... ३२५-सात पाताललोकोंका वर्णन..... १२६
९-दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्‌का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन..... ३५६-भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन..... १२८
१०-भृगु, अग्नि और अग्निष्वात्तादि पितरोंकी सन्तानका वर्णन..... ४५७-भुर्भुवः आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त..... १३२
११-ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट..... ४६८-सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन..... १३५
१२-ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्‌का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान..... ५१९-ज्योतिष्चक्र और शिशुमारचक्र..... १४३
१३-राजा वेन और पृथुका चरित्र..... ५८१०-द्वादश सूर्योंके नाम एवं अधिकारियोंका वर्णन..... १४५
१४-प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन..... ६५११-सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन..... १४७
१५-प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी साठ कन्याओंके वंशका वर्णन..... ६८१२-नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तर-सम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार..... १४९
१६-नृसिंहावतारविषयक प्रश्न..... ८०१३-भरत-चरित्र..... १५३
१७-हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित..... ८११४-जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद..... १६०
१८-प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति..... ८९१५-ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश..... १६३
१९-प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान्‌का सुदर्शनचक्रको भेजना..... ९२१६-ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना..... १६५
तृतीय अंश
१-पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन..... १६९
२-सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन..... १७२
३-चतुर्युगानुसार भिन्न-भिन्न व्यासोंके नाम तथा ब्रह्मज्ञानके माहात्म्यका वर्णन..... १७६
४-ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार..... १७८