विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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वि० पृ० ॥ १ ॥
| अध्यायः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः | अध्यायः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| २३१ | ग्रहगृहीतकलक्षणानि .... | १४६ | २ | २४१ | अयोध्यायां ग्रीष्मवर्णनम् .... | " | " |
| २३२ | अभ्यङ्गिनवग्रहदोषहराः क्रिया गोद्विजदैवार्चकस्य सहानुकूला ग्रहाः .... | १४७ | २ | २४२ | साधुकण्टकं मधुवनं जहीति च्यवनपुरस्सरयमुनातीर्थयमुनिनृन्द आगते सर्वसन्यस्य शत्रुघ्नस्य रामाज्ञया तद्वधाय गमनम् .... | १५३ | १ |
| २३३ | शक्रकृतकार्तिकेयस्तुतिः, कार्तिकेयकृतमहिषासुरवधश्च .... | १४८ | १ | २४३ | प्रावृड्वर्णनम् .... | " | २ |
| २३४ | देवैर्द्दष्टं शङ्करभोगेकल्पिते शिवस्तवचित्रासत्रायामयां पुरोडाशमास्वापूर्व्यो दत्तान्भागानमन्दस्वतनाशयत्, यज्ञो नरनारायणाश्रममदवद्विष्णुशरणमगमद्दरस्तमनुजग्राह च | " | २ | २४४ | शत्रुघ्नं प्रति रामाज्ञोक्तेन शरद्वर्णनम् .... | १५४ | १ |
| २३५ | गङ्गाद्वारे दक्षयज्ञे शङ्करानाह्वानारम्भदम्भदकल्याक्ष्म्या दक्षस्याहविश्चेत्तः, वीरभद्रोपशांस्तुतमद्रकण्ठेश्वरो दक्षाश्वमेधसहस्रफलं लेभे । रुद्रद्वारे कृशावतीतीर्थपञ्चकमाशास्त्यम् .... | " | २ | २४५ | शत्रुघ्नं प्रति रामकर्तृक हेमन्तकत्तव्योपदेशे हेमन्तवर्णनम् .... | " | " |
| २३६ | शम्भुं प्रजायते क्षेत्रज्ञौ श्रुतिमान् कालस्तस्यायुः पूर्णत्वात्तमानंतं तद्देशमागतः, कृतेष्णववचन्वलक्षः शम्भुः कालं भस्मसादकरोत् .... | १४९ | १ | २४६ | शत्रुघ्नाय रामोपदेशे शिशिरवर्णनम् .... | " | २ |
| २३७ | नारायणवर्मकथनम् .... | १५० | १ | २४७ | श्रौतशिष्टाचारादिपादविभावाय शत्रुघ्नो मथुराजिगमिषया प्रथमं वाल्मीक्याश्रमं माप, शत्रुघ्नकृतलवणवधनानन्तरं सुभीतदेवेच्छया शत्रुघ्नेन मथुरानिर्माणम् । .... | १५५ | १ |
| २३८ | स्वप्रतिमार्य्यज्ञासाया बलिस्झनि गते रावणे तांहांडलंछद्मद्वारं विष्णुं जेक्ष्यामीति ब्रुवाणे तदस्यभक्तकमानार्थयाञ्प्रशिंशोहि बलिनोक्तः स सर्वबलोऽपि न शशाक कुण्डलमपनेतुम्, एताभ्यां च कुण्डलाभ्यां हिरण्यकशिपोर्मत्यपितामहोऽशोभत यमयं मस्कृणाप्रायमभवद् यूथा तजये तवाशेति .... | " | " | २४८ | पुलहवंशवर्णनसंप्रसङ्गे सुमातृसंगमन्तालिकन्यानां पुलहद्धाग सुगादिप्रथिर्वणनम् । .... | " | २ |
| २४९ | ओषधिविराजितकञ्जयत्रतपसां चन्द्रं, सर्वजगतारीनां दक्षं, सर्वगन्धर्वाणां मनसं सुरर्षीणां मन्मथमित्यादि मतिसमूहे राजकर्तृत्वम् .... | १५६ | १ | ||||
| २५० | ब्रह्मा देवराड्ये काश्यपं शक्रर्माभषेपेच .... | " | " | ||||
| २३९ | रावणस्य विष्णुपराङ्मुखदर्शनम् .... | १५१ | २ | २५१ | मतंगजानां कुलाङ्गकानि वनाष्टकञ्च .... | १५७ | १ |
| २४० | अयोध्यायां वसन्तवर्णनम् । .... | १५२ | २ | २५२ | वानरोत्पत्तिवर्णनं तत्कर्तृकदिनपराजयाश्च । .... | १५८ | २ |
| २५३ | गजवानरयुद्धवर्णनम् । .... | " | " | ||||
| २५४ | श्री भरतेन सह योद्धुमयय सर्वैर्वानरासमवदमुतूरमावश्यकं कृत्वा श्व आगतव्यमिति शैलपुनिनिंदना । .... | १५९ | २ |
अनु० ॥ १ ॥