विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)
Viveka Chudamani with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished153 पृष्ठ
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अन्नमय कोश ४७ प्रकार तेरी कभी आत्मबुद्धि नहीं होती, उसी प्रकार जीवित शरीरमें भी कभी न होनी चाहिये। देहात्मधीरेव नृणामसिद्धां जन्मादिदुःखप्रभवस्य बीजम्। यतस्ततस्त्वं जहि तां प्रयत्ना- त्यक्ते तु चित्ते न पुनर्भवाशा ॥ १६६ ॥ क्योंकि देहात्म-बुद्धि ही असद्बुद्धि मनुष्योंके जन्मादि दुःखोंकी उत्पत्तिकी कारण है, अतः उसे तू प्रयत्नपूर्वक छोड़ दे, उस बुद्धिके छूट जानेपर फिर पुनर्जन्मकी कोई आशंका न रहेगी।