भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ११० ) १५. मस्तिष्क रेखा जहां समाप्त होती है उस स्थान पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति निश्चय ही वृद्धावस्था में पागल हो जाता है। १६. यदि मस्तिष्क रेखा चन्द्र पर्वत के ऊपर से होती हुई मणिबन्ध तक पहुंच जाती है तो ऐसा व्यक्ति जीवन-भर दुखी, दरिद्री और निकम्मा रहता है। १७. यदि यह रेखा मणिबन्ध तक पहुंच कर रुक जाती है और इसके आगे क्रॉस का चिह्न होता है तो वह व्यक्ति निश्चय ही आत्महत्या करता है। १८. यदि मस्तिष्क रेखा के अन्तिम छोर पर दो भाग हो जाते हैं तो वह व्यक्ति कई प्रयत्नों से धन-संग्रह करने में लगा रहता है। जीवन में ऐसे व्यक्ति को धन, यश, मान, पद, प्रतिष्ठा सहज ही मिल जाते हैं। १९. यदि मस्तिष्क रेखा मंगल क्षेत्र पर ही समाप्त हो जाय तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में असफल ही रहता है। २०. यदि मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत की ओर जाती हो तथा उसके अन्तिम सिरे पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति आधा पागल कहलाता है, तथा जीवन में उसको असफलता ही मिलती है। २१. मस्तिष्क रेखा जिस स्थान पर भी हृदय रेखा को काटती है जीवन की उस उम्र में व्यक्ति को बहुत बड़ी स्वास्थ्य की हानि होती है। २२. यदि हाथ में मस्तिष्क रेखा दोहरी हो अर्थात् मस्तिष्क रेखा के साथ ही साथ उसकी सहायक रेखा भी चल रही हो तो ऐसा व्यक्ति अत्यन्त भाग्यवान कहलाता है। २३. यदि दोहरी मस्तिष्क रेखा सीधी, स्पष्ट और सपाट हो तो निश्चय ही व्यक्ति कूटनीति में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है। २४. यदि मस्तिष्क रेखा चलते-चलते मार्ग में टूट गई हो तो वह असंतुलित मस्तिष्क वाला होता है। २५. यदि मस्तिष्क रेखा गुरु पर्वत के नीचे ही खण्डित हो जाती है तो उस व्यक्ति को बचपन में भयंकर चोट लगती है। इसी प्रकार यदि यह रेखा शनि पर्वत के नीचे टूटती है तो २४वें वर्ष में शस्त्र घात का योग बनता है। २६. यदि मस्तिष्क रेखा सूर्य पर्वत के नीचे भंग हो जाती है, तो उस व्यक्ति को नौकरी में बहुत बदनामी का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसी रेखा बुध पर्वत के नीचे जाकर टूटती हो तो उसे व्यापार में दिवालिया होना पड़ता है। २७. यदि मस्तिष्क रेखा जंजीर के समान हो तो उसे जीवन में मस्तिष्क सम्बन्धी रोग रहते हैं। २८. यदि गुरु पर्वत के नीचे मस्तिष्क रेखा पर किसी प्रकार का कोई द्वीप हो तो वह व्यक्ति पागल होता है।