भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ११३ ) ६२. यदि यह रेखा जालीदार हो तो वह कुबास बनता होता है । ६३. यदि यह रेखा तिरछापन लिये हुए आगे बढ़ती हो तो ऐसा व्यक्ति जूए में अपना सब-कुछ बर्बाद कर लेता है। ६४. यदि यह रेखा हथेली के बीच में समाप्त होती है तो वह व्यक्ति पागल होता है। ६५. यदि यह रेखा कुछ दूर चलकर वापिस मुड़ जाती हो तो ऐसे व्यक्ति का प्रेम में दुखद अन्त होता है । ६६. यदि यह भाग्य रेखा के आस-पास जाकर समाप्त होती है तो वह व्यक्ति २५ साल के पहले-पहले मृत्यु को प्राप्त हो जाता है । ६७. यदि इसका अन्त बुध पर्वत की ओर हो तो वह व्यवस्थित कार्य करने वाला व्यक्ति होता है । यदि इसका अन्त मंगल पर्वत पर हो तो उसे दिमागी परेशानी रहती है । ६८. यदि यह रेखा छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी हुई हो तो वह व्यक्ति अत्यधिक घमण्डी होता है । ६६. यदि यह सूर्य क्षेत्र के नीचे टूट जाती है तो हिंसक पशु के आघात से उसकी मृत्यु होती है । ७०. यदि मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा मिलकर न्यून कोण बनाते हों तो वह व्यक्ति राज्य सेवा में अत्यन्त उच्चपद पर पहुंचता है । ७१. यदि यह जीवन रेखा से मिलकर हृदय रेखा की ओर जा रही हो तो वह व्यक्ति अंधा होता है । ७२. यदि मस्तिष्क रेखा और स्वास्थ्य रेखा दोनों के अन्तिम सिरे पर क्रॉस का चिह्न हो तो उसे जीवन में मस्तिष्क रोगों से ग्रसित होना पड़ता है । ७३. यदि मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा दोनों टूटी हुई हों तो उसे गृहस्थ- जीवन का सुख नहीं मिलता । ७४. यदि स्वास्थ्य रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनों ही लहरदार हों तो उस व्यक्ति का स्वास्थ्य अत्यन्त कमजोर होता है । ७५. यदि हथेली के मध्य में यह हृदय रेखा से मिलती है तो उसके जीवन में शस्त्र भय बना रहता है । ७६. यदि कोई अन्य रेखा मस्तिष्क रेखा को काट दे तो उसका मस्तिष्क कमजोर होता है । ∙ ७७. यदि मस्तिष्क रेखा टूटी हुई हो तथा इसके साथ अन्य रेखाएं भी हों वह व्यक्ति जीवन में पागल होता है ।