भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ११४ ) ७८. यदि कोई रेखा शुक्र पर्वत से निकलकर मस्तिष्क रेखा को काटती हो तो उसका गृहस्थ-जीवन बरबाद हो जाता है । ७६. यदि मस्तिष्क रेखा से कोई शाखा निकलकर शुक्र पर्वत की ओर जाती हो तो उसका प्रेम जीवन-भर गुप्त बना रहता है । ८०. यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर गुरु पर्वत की ओर जाती हो तो वह व्यक्ति किराने का व्यापारी होता है । ८१. यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर शनि पर्वत की ओर जाती हो तो वह जीवन में उच्चकोटि का धार्मिक व्यक्ति होता है । ८२. यदि इस रेखा से निकल कर कोई सहायक रेखा सूर्य पर्वत की ओर जाती हो तो उसे आकस्मिक धन-लाभ होता है । ८३. यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा बुध पर्वत की ओर जाती हो तो निश्चय ही वह लाखों का स्वामी होता है । ८४. यदि इस रेखा के अन्त में रेखाओं का गुच्छा-सा हो तो वह व्यक्ति कुटिल झूठा एवं चालाक होता है । ८५. यदि शनि पर्वत के नीचे इस रेखा पर सफेद धब्बे हों तो उसे जीवन में आर्थिक सफलता मिलती है । ८६. यदि सूर्य पर्वत के नीचे इस रेखा पर सफेद धब्बे हों तो उसे राष्ट्र- व्यापी सम्मान मिलता है । ८७. यदि बुध पर्वत के नीचे इस रेखा पर सफेद धब्बे हों तो वह व्यक्ति करोड़पति होता है । ८८. यदि मंगल पर्वत बलवान हो और इस रेखा के अन्त में त्रिकोण बना हुआ हो तो वह अपने जीवन में किसी न किसी की हत्या अवश्य करता है । ८६. यदि इस रेखा पर कहीं पर भी लाल धब्बा हो तो सिर पर चोट लगने से उस व्यक्ति की मृत्यु होती है । ६०. यदि इस रेखा पर कहीं पर भी नीला धब्बा होता है तो वह जीवन में अपराधी मनोवृत्ति का होता है । यदि यह रेखा तर्जनी के मूल तक पहुंच जाए तो वह जीवन में असफल व्यक्ति होता है । ६१. 'यदि यह रेखा मध्यमा उंगली पर चढ़ जाय तो उस व्यक्ति की डूबने से मृत्यु होती है ।