बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
DevanagariHindipublished350 पृष्ठ
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( ११५ ) ६३. यदि यह रेखा अनामिका के मूल तक पहुंच जाए तो ऐसा व्यक्ति प्रसिद्ध तांत्रिक होता है। ६४. यदि यह रेखा कनिष्ठिका उंगली पर चढ़ जाय तो उसकी सन्निपात की अवस्था में मृत्यु होती है। ६५. यदि यह रेखा सभी दृष्टियों से दोष मुक्त हो तो उसका चुम्बकीय व्यक्तित्व होता है। वस्तुतः मस्तिष्क रेखा का हथेली में बहुत बड़ा महत्त्व होता है और यदि इस रेखा का सम्यक् अध्ययन न किया जाए तो सही भविष्यफल स्पष्ट करना कठिन हो जाता है। इसलिये हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह मस्तिष्क रेखा का भली-भांति अध्ययन कर अपनी धारणा को पुष्ट बनाकर भविष्य कथन करे जिससे वह अपने जीवन में यशस्वी हो सके।