भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 118, कुल 350 में से

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उसकी भावनाएं, उसकी मानसिक क्रियाएं तथा आन्तरिक गोपनीय तथ्यों का पता लगता है। अब मैं प्रत्येक प्रकार की स्थिति का संक्षेप में वर्णन कर रहा हूं : पहला प्रकार : इस प्रकार की हृदय रेखा जिसकी हथेली में होती है वह सर्वश्रेष्ठ रेखा कहलाती है। सही रूप में देखा जाय तो यह रेखा अपनी अन्तिम अवस्था में शनि और गुरु पर्वत को विभक्त कर लेती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों की भलाई करने वाले निष्पक्ष, स्वतंत्र विचार-धारा रखने वाले तथा प्रेम के क्षेत्र में धैर्य से काम लेने वाले होते हैं। इनके जीवन में न तो उच्छृंखलता होती है, और न अधूरापन ही स्पष्ट होता है। ऐसे व्यक्ति अपने वचनों की सामर्थ्य समझते हैं और जीवन में जो भी बात कह देते हैं उसे पूरी तरह से निभाने की क्षमता रखते हैं। ऐसा व्यक्ति हल्के स्तर का नहीं होता तथा अपनी पत्नी को भी सबसे अधिक महत्त्व देता है। यद्यपि यह बात सही है कि इसके जीवन में प्रेमिकाएं होती हैं। परन्तु उन्हें यह जरूरत से ज्यादा महत्त्व नहीं देते। ऐसा व्यक्ति धार्मिक सात्विक तथा ईमानदार होता है। न तो यह धोखा खाता है और न किसी को धोखा देने का प्रयत्न करता है। इसका हृदय दयालु होता है तथा इसके जीवन को 'आदर्श जीवन' कहा जा सकता है। ऐसे व्यक्ति अपने प्रयत्नों से जीवन में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। दूसरा प्रकार : इसमें हृदय रेखा का उद्गम बुध पर्वत के नीचे से ही होता है। परन्तु इसका अन्त तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच में न होकर गुरु पर्वत के नीचे चलकर हथेली के पास जाकर होता है। ऐसी रेखा बहुत ही कम लोगों के हाथों में दिखाई देती है परन्तु जिन व्यक्तियों के हाथों में ऐसी रेखा होती है वे व्यक्ति जीवन में जरूरत से ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं और अपने प्रयत्नों से अपने जीवन को सुखमय बनाने में समर्थ होते हैं। सही रूप में देखा जाय तो ऐसे व्यक्ति कठोर परिश्रमी होते हैं और इनका लक्ष्य हमेशा इनके सामने रहता है। जब तक ये अपने लक्ष्य को भली प्रकार से प्राप्त नहीं कर लेते तब तक ये जीवन में विश्राम नहीं लेते । इस रेखा के बारे में विचारणीय तथ्य यह है कि जहां यह रेखा समाप्त होती है उस स्थान का सूक्ष्मता से अध्ययन आवश्यक है। यदि अन्तिम स्थिति में इस रेखा का झुकाव नीचे की तरफ होता है तो वह व्यक्ति अपने जीवन में अपनी इच्छाओं को