बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११८ ) पूरी नहीं कर पाता। परन्तु अन्तिम अवस्था में यदि यह रेखा ऊपर की ओर उठती हुई दिखाई दे तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है और उसके सोचे हुए सभी काम पूरे हो जाते हैं। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा की दृष्टि से पूर्ण सौभाग्यशाली कहा जाता है। तीसरा प्रकार : इस प्रकार की रेखा बुध पर्वत के नीचे से लेकर सूर्य पर्वत के नीचे ही समाप्त हो जाती है। ऐसा व्यक्ति अदूरदर्शी तथा कुण्ठाग्रस्त होता है। इसका हृदय कमजोर होता है। छोटी-छोटी बातों पर झुंझला जाता है, तथा इसका स्वभाव चिड़चिड़ा होता है। सही रूप में देखा जाय तो ऐसे व्यक्ति दयाहीन होते हैं। ये व्यक्ति दुःखी मनुष्यों की सहायता नहीं करते अपितु उनकी निन्दा करने में ही अपना सौभाग्य मानते हैं। ऐसे व्यक्ति सामान्य दृष्टि से सफल नहीं कहे जा सकते। वृद्धावस्था में ऐसा व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित रहता है। तथा ऐसे व्यक्तियों की मृत्यु हार्ट-अटैक से ही होती है। चौथा प्रकार : कुछ लोगों के हाथों में यह रेखा बुध पर्वत के नीचे से निकलकर शनि पर्वत के नीचे जाकर समाप्त हो जाती है। ऐसे व्यक्ति कई स्त्रियों से प्रेम करते हैं और लगभग सभी को धोखा देते हैं। इनके जीवन में छल, कपट आदि बराबर बना रहता है। सही शब्दों में कहा जाय तो ऐसे लोगों पर पूरी तरह से विश्वास नहीं किया जा सकता। इनका प्रेम सात्त्विक प्रेम न होकर वासना-पूर्ति का एक साधन होता है। इनके मन में बराबर स्वार्थ बना हुआ होता है, तथा लोगों को धोखा देने में ये कुशल होते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रदर्शन तथा आडम्बर को ज्यादा महत्त्व देते हैं। झूठा प्रचार नकली शान-शौकत तथा व्यर्थ का दिखावा करने में यह विश्वास रखते हैं। एक बार तो लोग इनका विश्वास कर लेते हैं, परन्तु बाद में इनसे वे लोग घृणा करते हैं। अपना काम निकल जाने के बाद ये उसकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देखते । समाज में इन लोगों को किसी प्रकार का आदर या सम्मान नहीं मिलता। ऐसे व्यक्ति निर्दयी, डाकू तथा अत्याचारी भी हो सकते हैं। पांचवां प्रकार : जिनके हाथों में इस प्रकार की हृदय रेखा दिखाई देती है वे व्यक्ति एक प्रकार से आत्म केन्द्रित से ही होते हैं, और जीवन में लगभग अपने आप में ही खोये रहते हैं।