बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२० ) ८. यदि किसी की हथेली में हृदय रेखा पर द्वीप का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति समाज में विशेष सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता तथा उसका सामाजिक स्वरूप एक तरह से खण्डित हो जाता है । ९. हृदय रेखा जितनी अधिक लम्बी होती है और बृहस्पति पर्वत से जितनी ही अधिक दूर होती है उतनी ही ज्यादा श्रेष्ठ कही जाती है । १०. यदि हृदय रेखा चलती-चलती मार्ग में कहीं टूट जाती है और फिर आगे चलकर प्रारम्भ हो जाती है, तो जीवन के उस भाग में वह व्यक्ति मृत्यु-तुल्य कष्ट उठाता है । ११. यदि हृदय रेखा लम्बी स्पष्ट तथा सुन्दर होती है तो उस व्यक्ति को प्रत्येक प्राणी से भरपूर प्यार तथा स्नेह मिलता है । १२. यदि हृदय रेखा हथेली के पास पहुंच जाती है तो वह व्यक्ति किसी के भी प्रति अन्ध श्रद्धा का शिकार होता है । १३. यदि हृदय रेखा कई जगह से कटी हुई हो तो उस व्यक्ति के जीवन में निराशा की भावना बराबर बनी रहती है । १४. यदि हथेली में दूसरी हृदय रेखा हो तो वह व्यक्ति जीवन में ऊंचे स्तर पर प्रेम करता है परन्तु उसे जीवन में निराशा हाथ लगती है । १५. यदि हृदय रेखा के अन्त में तारे का चिह्न बना हुआ हो तो उस व्यक्ति की मृत्यु आकस्मिक दुर्घटना से होती है । १६. यदि हृदय रेखा वृहस्पति पर्वत को घेर कर चलती हो तो उस व्यक्ति में नफरत की भावना जरूरत से ज्यादा होती है । १७. यदि हृदय रेखा पर नक्षत्र का चिह्न दिखाई देता है तो वह व्यक्ति आजीवन रोगी बना रहता है । १८. यदि हृदय रेखा के अन्तिम सिरे दो भागों में बंट जाते हैं तो ऐसा व्यक्ति सफल न्यायाधीश सहृदय सामाजिक तथा सद्गुणों से सम्पन्न होता है । १९. यदि यह रेखा शनि पर्वत पर समाप्त हो जाती है तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कामी होता है । २०. यदि यह सूर्य पर्वत पर समाप्त हो जाती है तो ऐसा व्यक्ति बार-बार धोखा खाता है । २१. यदि यह रेखा गुरु पर्वत के नीचे जाकर त्रिशूल की तरह बन जाती है, तो उसका यौवन काल पागलखाने में ही व्यतीत होता है । २२. यदि शनि पर्वत के नीचे हृदय रेखा तथा मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस का चिह्न हो तो उस व्यक्ति की बहुत छोटी उम्र में मृत्यु हो जाती है ।